Mithilesh Thakur

मुख्यमंत्री के बाद अब मंत्री मिथिलेश ठाकूर(Mithilesh thakur)के खिलाफ शिकायत, State EC ने गढ़वा Dc से मांगी रिपोर्ट

झारखंड सरकार के मंत्रियों पर इन दिनों लगातार आरोप लग रहे हैं खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस कोटे से मंत्री बन्ना गुप्ता कांग्रेस कोटे के ही मंत्री आलमगीर आलम के बाद अब जेएमएम कोटे के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ( Mithilesh thakur )पर बड़ा संगीन आरोप लगा है कहां तो यह जा रहा है कि झारखंड के पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर पर इतना गंभीर गंभीर आरोप है कि उनकी  विधायकी तक जा सकती है मीडिया रिपोर्ट की माने तो मिथिलेश ठाकुर जिस कंपनी में पार्टनर हैं व कंपनी सरकारी ठेके लेती है लेकिन 2019 के बाद भी वह मंत्री के पद पर भी रहे और कंपनी के पार्टनर भी बने रहे 23 मार्च को RTI एक्टिविस्ट सुनील महतो द्वारा मंत्री मिथिलेश ठाकुर को अयोग्य घोषित करने को लेकर बिंदुवार शिकायत की गयी है.

 

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आरोप में कहा गया है कि झारखंड असेम्बली इलेक्शन– 2019 में गढ़वा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित मिथिलेश कुमार ठाकुर का निर्वाचन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 9A के दायरे में है. उनकी सदस्यता समाप्त करने योग्य है.

 

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दरअसल आरोप है कि मिथिलेश कुमार ठाकुर द्वारा अपने फॉर्म 26 में दिए गए ब्यौरे के अनुसार, वह मेसर्स सत्यम बिल्डर्स, अमला टोला, चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम के पार्टनर हैं. यह कंपनी सरकारी ठेका लेने का काम करती है. सत्यम बिल्डर्स द्वारा सरकार के साथ की गई कई टेंडर विधानसभा निर्वाचन 2019 के दौरान अस्तित्व में थी. सरायकेला-खरसावां मार्ग पर बनी संजय नदी पर 8.18 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए मिथिलेश ठाकुर की कंपनी ने सरायकेला-खरसावां पथ निर्माण विभाग से 21 मई 2013 को एग्रीमेंट किया था. एग्रीमेंट के अनुसार, कार्य समाप्ति की तिथि 20 अक्टूबर 2014 थी. उक्त पुल निर्माण का कार्य जनवरी 2022 तक लंबित है. यानी मिथिलेश कुमार ठाकुर द्वारा पथ निर्माण विभाग के साथ की गई संविदा विधानसभा चुनाव 2019 के बाद भी जनवरी 2022 तक अस्तित्व में है.

 

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आरोपी अभी है कि बिहार सरकार की कंपनी बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड के साथ तिरहुत पूर्वी प्रमण्डल के क्षेत्राधीन कई मॉडल स्कूल के भवनों का निर्माण कार्य के लिए मेसर्स सत्यम बिल्डर्स द्वारा 2014 में एग्रीमेंट किया गया, जो कि विधानसभा चुनाव 2019 के समय अस्तित्व में थी. एग्रीमेंट के अनुसार, काम पूरा नहीं होने पर बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड ने 16 अगस्त 2021 को यह एग्रीमेंट रद्द कर दिया है.

 

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आरोप में कहा गया है कि 9.36 करोड़ की लागत से चक्रधरपुर नगर परिषद भवन कार्यालय का निर्माण, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य विधान सभा चुनाव 2019 के दौरान लंबित था. यह संविदा भी लंबित थी.

 

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मीडिया रिपोर्ट में मिथिलेश ठाकुर पर आरोप ये भी है कि जगन्नाथपुर में आईटीआई कॉलेज के भवन निर्माण में मजदूरों को निर्धारित मजदूरी दर नहीं देने पर 25 मजदूरों ने 6 अगस्त 2013 को मेसर्स सत्यम बिल्डर्स के खिलाफ श्रम विभाग से शिकायत की थी. इसी तरह झींकपानी में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में 44 मजदूरों ने कम मजदूरी देने की शिकायत की थी. श्रम विभाग ने दोनों मामलों में कुल 1,06,815 रुपये का जुर्माना लगाया था. जिसे मिथिलेश ठाकुर की कंपनी ने अभी तक नहीं चुकाया है. आरोप है कि ऐसे में मिथिलेश ठाकुर दो दो लाभ के पद पर बने हुए हैं जबकि नियम अनुसार उन्हें कंपनी के पार्टनरशिप से खुद को अलग कर लेना था लेकिन मिथिलेश ठाकुर ने ऐसा नहीं किया आरोप ये भी है कि इस दौरान इस कंपनी ने झारखंड में भी और कई  ठेके लिए

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