गोवंशीय तस्करी के मनी ट्रेल का खुलासा, पूर्व CSC संचालक गिरफ्तार

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा: गोवंशीय पशु तस्करी के मामले की जांच कर रही सिमडेगा पुलिस ने तस्करी के पीछे चल रहे आर्थिक नेटवर्क और डिजिटल लेन-देन की कड़ी का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में एक पूर्व जन सेवा केंद्र (CSC) संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह तस्करों से वसूली गई अवैध रकम को UPI के जरिए अपने बैंक खाते में प्राप्त करता था और बाद में तस्करी से जुड़े लोगों अथवा उनके रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करता था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अरविन्द केरकेट्टा, पिता अंथ्रेस केरकेट्टा, निवासी बासेन गोदाटोली, थाना केरसई, जिला सिमडेगा के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपी को 15 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 16 अगस्त को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मामला 12 सितंबर 2025 का है। गुप्त सूचना के आधार पर मुफस्सिल थाना पुलिस ने ग्राम बनावीरा में छापेमारी कर दो पिकअप वाहनों से अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे गोवंशीय पशुओं को बरामद किया था। इस संबंध में मुफस्सिल थाना कांड संख्या 25/2025 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता, झारखंड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में पूर्व में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

पुलिस अधीक्षक श्रीकांत राव खोटरे के निर्देश पर मामले के अनुसंधान के दौरान पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और मनी ट्रेल की गहन जांच शुरू की। इसी जांच में अरविन्द केरकेट्टा की कथित भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, अनुसंधान और आरोपी के स्वीकारोक्ति बयान में सामने आया कि अरविन्द करीब एक वर्ष पहले तक CSC का संचालन करता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात गो तस्करी से जुड़े आरोपी संजय समीर सिंधिया से हुई थी।
आरोप है कि संजय समीर सिंधिया के निर्देश पर अन्य तस्करों से गोवंशीय पशुओं को वाहन अथवा पैदल सिमडेगा जिले से पार कराने के एवज में वसूली गई रकम अरविन्द के बैंक खाते में UPI के माध्यम से भेजी जाती थी। इसके बाद वह कथित तौर पर संजय समीर सिंधिया के निर्देश पर रकम को उसके या उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर करता था।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है। बैंकिंग रिकॉर्ड, UPI ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर तस्करी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है। इस कार्रवाई से पुलिस ने गोवंशीय तस्करी की जांच को केवल वाहनों और तस्करों तक सीमित रखने के बजाय उसके आर्थिक नेटवर्क और मनी ट्रेल तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
सिमडेगा पुलिस ने कहा है कि गोवंशीय पशुओं की अवैध तस्करी और परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। तस्करी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















