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भारत-चीन संबंधों में नया मोड़? वांग यी और जयशंकर की मुलाकात पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, चीनी विदेश मंत्री वांग यी 18-20 अगस्त तक भारत दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होगी। यह दौरा दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सीमा विवाद पर 24वें दौर की वार्ता

वांग यी और अजीत डोभाल के बीच भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 24वीं दौर की वार्ता होगी। यह वार्ता वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने, सैनिकों की वापसी और विश्वास बहाली जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगी। गलवान घाटी में जून 2020 के संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था, लेकिन हाल के महीनों में सैनिकों की सीमित वापसी और संवाद के प्रयासों से सकारात्मक संकेत मिले हैं।

जयशंकर के साथ द्विपक्षीय चर्चा

वांग यी की विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली बैठक में व्यापार, कूटनीति, वीजा नियमों में ढील, और हवाई संपर्क की बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जयशंकर ने पहले भी बीजिंग में वांग यी से मुलाकात के दौरान स्थिर सीमा को द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद बताया था और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि भारत-चीन संबंधों में किसी तीसरे देश, विशेष रूप से पाकिस्तान, की दखलअंदाजी स्वीकार्य नहीं है।

मोदी की चीन यात्रा से पहले अहम कदम

यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए संभावित चीन यात्रा (31 अगस्त-1 सितंबर) से पहले हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक स्थिरता और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

संबंधों में सुधार के संकेत

पिछले साल अक्टूबर में कजान में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच संवाद के तंत्र को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया था। इसके परिणामस्वरूप, डेमचोक और देपसांग जैसे क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी हुई और कैलाश मानसरोवर यात्रा भी पुनः शुरू की गई। भारत ने हाल ही में चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से शुरू किए हैं, जो संबंधों में सुधार का एक और संकेत है।

जयशंकर ने बीजिंग में कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर संबंध न केवल दोनों देशों, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने व्यापारिक बाधाओं, विशेष रूप से चीन के खनिज निर्यात प्रतिबंधों, को हटाने और लोगों के बीच संपर्क को सामान्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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