विश्व शेर दिवस पर राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने जारी की डॉक्यूमेंट्री, ‘गिर की अमूल्य धरोहर’ में दिखी एशियाई शेरों के संरक्षण की कहानी

रांची\ : विश्व शेर दिवस के मौके पर राज्यसभा सांसद और वन्यजीव प्रेमी परिमल नथवाणी ने एशियाई शेरों के संरक्षण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री गिर की अमूल्य धरोहर’जारी की। डॉक्यूमेंट्री में गुजरात के गिर क्षेत्र में एशियाई शेरों के संरक्षण की लंबी यात्रा, वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों के बीच सह-अस्तित्व तथा शेरों की सुरक्षा में जुटे वनकर्मियों और अधिकारियों के प्रयासों को प्रमुखता से दिखाया गया है।

डॉक्यूमेंट्री में खास तौर पर गिर की शेरनियों की भूमिका को रेखांकित किया गया है। शावकों के पालन-पोषण से लेकर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने तक शेरनियों का योगदान एशियाई शेरों की बढ़ती आबादी के लिए बेहद अहम माना गया है। इसके साथ ही मालधारी समुदाय और वन्यजीवों के बीच पीढ़ियों से चले आ रहे सह-अस्तित्व की तस्वीर भी फिल्म में दिखाई गई है।
संरक्षण की मुहिम में फ्रंटलाइन टीमों की अहम भूमिका
‘गिर की अमूल्य धरोहर’ में उन वन अधिकारियों, वनकर्मियों और ट्रैकर्स के काम को भी सामने लाया गया है, जो शेरों की निगरानी और सुरक्षा में लगातार जुटे रहते हैं। शेरों के प्रजनन क्षेत्रों को मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने और उनके प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाए रखने जैसी पहल को संरक्षण की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
डॉक्यूमेंट्री का संदेश यह है कि शेरों की संख्या बढ़ने के साथ उनके प्राकृतिक क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। मानव और वन्यजीव के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए शेरों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास का सम्मान करना जरूरी है।

एक दशक में 70 फीसदी से अधिक बढ़ी शेरों की संख्या
डॉक्यूमेंट्री का लोकार्पण ऐसे समय हुआ है जब गुजरात में एशियाई शेरों की संरक्षण यात्रा में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में एशियाई शेरों की संख्या में 70 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है और वर्ष 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 891 हो गई।
वयस्क शेरनियों की संख्या भी बढ़कर ३३० तक पहुंच चुकी है। वहीं, एशियाई शेरों का प्राकृतिक वितरण क्षेत्र करीब 35 हजार वर्ग किलोमीटर तक फैल गया है। यह क्षेत्र सौराष्ट्र के 11 जिलों की 58 तहसीलों तक विस्तारित हो चुका है।
गुजरात का बरडा क्षेत्र भी एशियाई शेरों के दूसरे घर के रूप में विकसित हो रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि शेर अब गिर से बाहर नए प्राकृतिक भू-दृश्यों में भी अपनी मौजूदगी स्थापित करने में सक्षम हो रहे हैं।

परिमल नथवाणी ने बताया संरक्षण की अगली चुनौती
डॉक्यूमेंट्री के लोकार्पण पर परिमल नथवाणी ने कहा कि एशियाई शेरों के संरक्षण की सफलता दूरदर्शी नेतृत्व, वन अधिकारियों, फ्रंटलाइन कर्मचारियों, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि गिर से उनका जुड़ाव तीन दशक से अधिक पुराना है और इस दौरान उन्होंने शेर संरक्षण की पूरी यात्रा को करीब से देखा है।
उन्होंने कहा कि अब जब शेरों का वितरण क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, संरक्षण की अगली प्राथमिकता शेरों और उनके समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होनी चाहिए। उनके अनुसार, प्राकृतिक आवास की रक्षा, शेरों के वितरण क्षेत्र का सम्मान और स्थानीय लोगों में वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भविष्य के संरक्षण प्रयासों के लिए जरूरी है।

शेर संरक्षण पर पहले भी काम कर चुके हैं नथवाणी
परिमल नथवाणी लंबे समय से गिर और एशियाई शेरों के संरक्षण से जुड़े रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी रुचि उनके कई रचनात्मक कार्यों में भी दिखाई देती है। उन्होंने गिर की शेरनी को समर्पित गीत गिर गजरती आवी सिंहण’ प्रस्तुत किया है।
इसके अलावा गिर के चर्चित शेर जोड़े को समर्पित जय-वीरू नी जोड़ी’ गीत और इसी जोड़े की कहानी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘जय-वीरू नी अमर गाथा’ भी उनके कार्यों का हिस्सा रही है।
गिर की अमूल्य धरोहर’ के जरिए गिर के पारिस्थितिक महत्व, एशियाई शेरों के संरक्षण की उपलब्धियों और इस पूरी मुहिम से जुड़े विभिन्न पक्षों को दस्तावेज के रूप में सामने लाने का प्रयास किया गया है। डॉक्यूमेंट्री का मूल संदेश यही है कि संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जंगल, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों के साझा भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी है।





















