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Ranchi News:-चार माह पूर्व ही मिली थी अधिनियम को मनज़ूरी,नियमावली के अभाव में फंसी कृषि बाजार शुल्क की वसूली, मार्केट यार्ड का विकास भी बाधित

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प्रेरणा चौरसिया

Drishti  Now  Ranchi

कृषि बाजार समिति टैक्स लगाने वाला झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम मंजूरी के चार माह बाद भी नियमावली नहीं बन पाने के कारण लागू नहीं हो सका है। तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने इस विधेयक को दो बार लौटाने के बाद तीसरी बार में 31 जनवरी को मंजूरी दी थी।

नियमावली के अभाव में टैक्स वसूली शुरू नहीं हो सकी है और मार्केट यार्ड विकसित करने की योजना भी अधर में है। वर्ष 2022 के बजट सत्र में विधानसभा से पारित विधेयक में 2 प्रतिशत तक टैक्स लगाने का प्रावधान है। बजट सत्र में 24 मार्च को सदन में हंगामे के बीच झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) विधेयक पारित हुआ था।

अधिनियम में निजी बाजार प्रांगण को भी विकसित करने का प्रस्ताव है। अधिनियम के तहत राज्य में गठित बाजार समिति द्वारा संचालित मार्केट यार्ड्स के भौतिक परिसर व कृषि से अधिसूचित अन्य बाजार, निजी मार्केट यार्ड्स और मार्केट सब यार्ड्स, प्रत्यक्ष मार्केटिंग कलेक्शन सेंटर्स और निजी किसान उपभोक्ता मार्केट यार्ड्स में व्यापार किया जाना है। इसमें फार्म गेट्स, कारखाने के परिसर, वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज शामिल हैं।

निजी व राष्ट्रीय महत्व के बाजार बनाने का काम शुरू नहीं

बाजार समिति के तहत निजी बाजार प्रांगण और राष्ट्रीय महत्व के बाजार प्रांगण की भी स्थापना का प्रावधान है। दोनों प्रांगणों में पशुधन की खरीद-बिक्री की सुविधा रहेगी। निजी बाजार प्रांगण में भी ई-व्यापार प्लेटफॉर्म होगा।

इसके लाइसेंसी ई-ट्रेडिंग पोर्टल के साथ एकीकृत करने के इच्छुक सरकार या एजेंसी के माध्यम से केंद्र सरकार को आवेदन कर सकेंगे। कृषि उपज को निर्यात करने के लिए उनको मुकमल व्यवस्था की भी व्यवस्था होगी। राज्य में अभी 28 स्थानों पर कृषि उत्पादन बाजार समिति प्रांगण है। सरकारी बाजार समिति प्रांगण के अलावा प्राइवेट बाजार प्रांगण भी डेवलप करने का प्रस्ताव है।

सरकार अब झारखंड चैंबर के साथ करेगी बैठक

कृषि विभाग ने राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम को लागू करने के लिए नियमावली की रूपरेखा तय की है, अब झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ बैठक करेगा। जिसमें सहमति ली जाएगी कि शुल्क के दायरे में कौन सा उत्पाद शामिल किया जाए और किन्हें टैक्स से बाहर रखा जाए।

पहले कृषि और गैर कृषि उत्पाद मिलाकर कुल 373 आइटम थे, अभी तैयार कृषि और गैर कृषि के 210 उत्पादों की एक सूची बनी है। इनमें से 50 समान को टैक्स से बाहर रखने का प्रस्ताव है। अंतिम सहमति बनने के बाद लागू होगा कि किस समान पर शुल्क नहीं लगेगा व किस पर नहीं। टैक्स लगेगा तो उसकी दर क्या होगी।

अभी 20 राज्यों में लागू है

अभी 20 राज्यों यूपी, एमपी, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिसा, केरला, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उतराखंड, तेलंगाना, असम, दिल्ली, तामिलनाडू व पुड्‌डुचेरी में कृषि बाजार शुल्क (सेस) लागू है।

अधिनियम को लागू करने के लिए नियमावली बनाने पर काम चल रहा है। कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ है, कुछ और काम अभी बाकी है।

-अबु बकर सिद्दीख पी, सचिव, कृषि, पशुपालन, सहकारिता

 

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