दृष्टि नाउ की खबर का बड़ा असर: फ्लाईओवर पर 5 दिनों से मौत से लड़ रही मासूम जान का हुआ सफल रेस्क्यू
दृष्टि नाउ की खबर का बड़ा असर: फ्लाईओवर पर 5 दिनों से मौत से लड़ रही मासूम जान का हुआ सफल रेस्क्यू


By Akash Singh
रांची 23 अप्रैल : कहते हैं कि अगर इरादे नेक हों और मीडिया अपनी जिम्मेदारी समझे, तो एक नन्ही और बेजुबान जान की पुकार भी सत्ता के गलियारों तक पहुँच जाती है। रांची के स्टेशन रोड फ्लाईओवर पर पिछले 5 दिनों से फंसी एक नन्ही बिल्ली के लिए ‘दृष्टि नाउ’ की खबर उम्मीद की किरण बनकर आई। खबर के प्रसारित होते ही प्रशासन हरकत में आया और देर रात एक भावुक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
मौत को मात: 70 फीट की ऊंचाई और 5 दिन का संघर्ष
पिछले 120 घंटों से वह नन्हा जीव फ्लाईओवर के पिलर और स्लैब के बीच फंसा हुआ था। बिना भोजन और पानी के, करीब 60–70 फीट की ऊंचाई पर वह मासूम डर से कांप रही थी। उसकी कमजोर पड़ती ‘म्याऊं’ फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाले शोर में दबती जा रही थी। स्थानीय लोगों ने कोशिश की, लेकिन ऊंचाई अधिक होने के कारण वे बेबस थे।
खबर का असर: हरकत में आया नगर निगम
जैसे ही दृष्टि नाउ ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया, मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँच गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों और मानवीय संवेदनशीलता को देखते हुए, रांची नगर निगम की टीम भारी क्रेन और रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुँची।
देर शाम चला ‘ऑपरेशन जिंदगी’
फ्लाईओवर पर ट्रैफिक का दबाव और ऊंचाई की चुनौती के बीच रेस्क्यू टीम ने साहस दिखाया:
क्रेन का इस्तेमाल: निगम कर्मियों ने हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से ऊंचाई तक पहुँच बनाई। हालांकि नन्ही सी जान डरी हुई थी उसने ऊपर से ही छलांग लगा दिया।
भावुक पल: जब कर्मी ने उस नन्ही जान को अपनी गोद में लियाफिर दूध पिलाने की कोशिश की गई लेकिन बिल्ली ने दूध नही पिया। उसके बाद उसे डॉक्टर के पास लाया गया।
सुरक्षित वापसी: हालांकि बिल्ली खुद डर से नीचे कूद गई लेकिन बिल्ली के बच्चे को तुरंत पानी व भोजन दिया गया। लेकिन शायद उस उस डर को भूलने में काफी वक्त लग जाये।
इंसानियत की जीत पर लोगों ने जताया आभार
रेस्क्यू के बाद स्थानीय निवासियों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, अगर मीडिया इस मुद्दे को नहीं उठाता, तो शायद यह बेजुबान दम तोड़ देता। लोगों ने त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री और नगर निगम की टीम का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
यह केवल एक बिल्ली का रेस्क्यू नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि एक सभ्य समाज में हर जीवन की कीमत है।

















