भारतीय वायुसेना का अद्भुत एयर शो, सूर्यकिरण एरोबैटिक्स टीम ने किया रोमांचक प्रदर्शन, जानिए सूर्य किरण टीम का इतिहास
रांची के नामकुम में खोजा टोली आर्मी ग्राउंड में भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने हॉक विमानों के साथ दूसरे दिन भी शानदार एयर शो प्रस्तुत किया। पायलटों ने आसमान में हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिसमें फॉग से तिरंगा बनाना और 5 मीटर से कम दूरी बनाए रखते हुए उड़ान शामिल थी। यह आयोजन सुबह 9:45 से 10:45 बजे तक हुआ, जिसमें नौ हॉक विमानों ने हिस्सा लिया।

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सूर्य किरण टीम का इतिहास :
सूर्य किरण एरोबैटिक टीम (SKAT) भारतीय वायुसेना की विश्व प्रसिद्ध प्रदर्शन टीम है, जिसकी स्थापना 1996 में हुई थी। यह भारत की पहली और विश्व की अग्रणी सैन्य एरोबैटिक टीमों में से एक है। इसका गठन वायुसेना के कौशल, अनुशासन और सटीकता को प्रदर्शित करने के लिए किया गया था।
गठन और शुरुआत:
सूर्य किरण की स्थापना बिदर (कर्नाटक) में 51वें स्क्वाड्रन के तहत हुई थी। शुरुआत में, टीम ने किरण Mk-II ट्रेनर विमानों का उपयोग किया, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित थे। पहला सार्वजनिक प्रदर्शन 1996 में बेंगलुरु में हुआ, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हॉक विमानों का उपयोग:
2015 में किरण विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के बाद, सूर्य किरण ने BAE हॉक Mk-132 उन्नत जेट ट्रेनर विमानों को अपनाया। हॉक विमानों ने टीम को अधिक गति, चुस्ती और जटिल करतब करने की क्षमता प्रदान की। सूर्य किरण ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदर्शन किया, जिसमें सिंगापुर, श्रीलंका, यूएई, यूके, और चीन जैसे देश शामिल हैं। 2003 में श्रीलंका में प्रदर्शन के दौरान, टीम ने विश्व में भारतीय वायुसेना की ताकत का परिचय दिया।
प्रदर्शन और विशेषताएं:
सूर्य किरण आमतौर पर नौ विमानों के साथ प्रदर्शन करती है, जो त्रिकोणीय, डेल्टा, और डायमंड जैसे जटिल फॉर्मेशन बनाते हैं। उनके करतबों में लूप्स, रोल्स, क्रॉस-ओवर, और फॉग से तिरंगा बनाना शामिल है। पायलट बेहद कम दूरी (5 मीटर से कम) बनाए रखते हुए उड़ान भरते हैं। 2011 के बाद किरण विमानों की पुरानी तकनीक और रखरखाव की चुनौतियों के कारण टीम का प्रदर्शन कुछ समय के लिए रुका। 2017 में हॉक विमानों के साथ सूर्य किरण ने शानदार वापसी की और तब से लगातार प्रदर्शन कर रही है।
सूर्य किरण का उद्देश्य:
सूर्य किरण का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना, देशभक्ति को बढ़ावा देना और भारतीय वायुसेना की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करना है। यह जनता और सैन्य बलों के बीच एक सेतु का काम करती है।
प्रशिक्षण और चयन:
सूर्य किरण के पायलट भारतीय वायुसेना के सबसे कुशल और अनुभवी लड़ाकू पायलटों में से चुने जाते हैं, जिनके पास कम से कम 2,000 घंटे की उड़ान का अनुभव होता है। विशेष प्रशिक्षण के बाद ही वे इस उच्च जोखिम वाले प्रदर्शन के लिए तैयार होते हैं। वर्ष 2025 में सूर्य किरण ने रांची, लखनऊ, और अन्य शहरों में अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों को आकर्षित किया।


















