RIMS

RIMS डॉक्टर मदन मौत मामला। पिता बोले ईंटों को सीमेंट-गारे से जोड़ न जाने कितने लोगों के घर बनाए। आज मेरा ही घर उजड़ गया

Share
Link copied

 

RIMS के जूनियर रेजिडेंट डाक्टर .मदन कुमार के पिता जब रांची आये और अपने बेटे को ऐसी हालत में देखा तो उनके थरथराई ओठो से सबसे पहली आवाज जो निकली वो ये थी। निर्जीव ईंटों को सीमेंट-गारे से जोड़ न जाने कितने लोगों के घर बनाए। आज मेरा ही घर उजड़ गया है। जिस बेटे को उम्मीदों और हंसते चेहरे के साथ रांची भेजा था, आज उसे चुपचाप ले जा रहा हूं। तमिल के साथ टूटी-फूटी हिंदी, रूंधा गला, कंपकपाते होंठ और लगातार आंसु बह रही आंखों के साथ पिता इससे अधिक बताने की स्थिति में नहीं थे। बार-बार इतना जरूर कहते रहे कि मेरा बेटा इतना कमजोर नहीं था कि मौत को गले लगाता। इसधर रिम्स में सभी स्टूडेंट और डाक्टरों ने मदन को श्रद्धांजलि देने और आरोपी की गिरफ़्तारी के लिए रिम्स कैम्पस में ही कैंडल मार्च निकाला। जाहिर है की रिम्स के एफएमटी विभाग के सेकेंड ईयर स्टूडेंट जूनियर रेजिडेंट डाक्टर .मदन कुमार एम. की गुरुवार सुबह संदेहास्पद स्थिति में जलता हुआ शव हॉस्टल के पीछे मिला था। क्या यह यह हत्या है इस बिंदु पर पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है। पर उनके पिता इस घटना को अपने बेटे के बुजदिली मानने को तैयार नहीं हैं।

डॉ. मदन कुमार के पिता माथियालगन ने अपना दर्द बयां किया। कहा कि मैं तमिलनाडु में राजमिस्त्री का काम करता हूं। शुरू से ही घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बेटे को डॉक्टर बनाने की सोचूं। बेटा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल था, हर एग्जाम में इतने अच्छे नंबर आते थे कि पड़ोसी भी अक्सर कहते थे, आपका बेटा नाम रोशन करेगा। कई बार स्थिति ऐसी भी आई कि घर में खाने के लिए पैसे नहीं होते थे, फिर भी बेटे की पढ़ाई में रुचि देखकर उसकी पढ़ाई में किसी तरह की आंच नहीं आने दी। मेरा बेटा इतना कमजोर नहीं था कि तनाव में आत्महत्या कर ले मैंने अपने बेटे को एक काबिल डॉक्टर बनाया था। पढ़ाई में अव्वल रहने वाले बेटे की अच्छी परवरिश की थी। वह किसी से ऊंची आवाज में बात भी नहीं करता था। किससे दुश्मनी थी नहीं मालूम, लेकिन मेरा बेटा इतना कमजोर नहीं था कि तनाव में आकर मौत को गले लगा ले। हां, उसकी मां बीमार रहती है, मां को लेकर चिंतित जरूर था। कपकपाते

मेरे बेटे को नीट काउंसिलिंग से जब रांची में पीजी की सीट मिली, उसकी खुशी देखते बन रही थी। खुशी-खुशी वह रांची रिम्स में पढ़ने आया था। फोन पर बातचीत में भी अक्सर रांची और यहां के मौसम की बात करता था। बेटा इस तरह हमें छोड़कर चला जाएगा, ये कभी नहीं सोचा था। पिता ने झारखंड के मुख्यमंत्री, राज्यपाल समेत सभी अधिकारियों से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच हो। बेटे ने खुदकुशी तो नहीं की है, उसकी मौत के पीछे जो लोग भी हैं, वे सामने आने चाहिए। जिस बेरहमी से बेटे को जिंदा आग में झोंक दिया, जो भी इसके पीछे है उस पर भी ऐसी ही कार्रवाई होनी चाहिए।

ABOUT THE AUTHOR
drishtinow

drishtinow