सरायकेला में 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली उजागर: एक एंबुलेंस ने दूसरी खराब एंबुलेंस को खींचकर पहुंचाया अस्पताल

सरायकेला में 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली उजागर: एक एंबुलेंस ने दूसरी खराब एंबुलेंस को खींचकर पहुंचाया अस्पताल

सरायकेला में 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली उजागर: एक एंबुलेंस ने दूसरी खराब एंबुलेंस को खींचकर पहुंचाया अस्पताल

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सरायकेला में 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली उजागर: एक एंबुलेंस ने दूसरी खराब एंबुलेंस को खींचकर पहुंचाया अस्पताल

सरायकेला-खरसावां, : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में स्वास्थ्य विभाग की इमरजेंसी सेवाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। जिले में 108 एंबुलेंस सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली व्यवस्था की खस्ता हालत सामने आई, जब एक खराब एंबुलेंस को दूसरी एंबुलेंस ने रस्सी से खींचकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ा। यह घटना जिला मुख्यालय क्षेत्र में हुई, जिसने स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकारी दावों की हकीकत बयां कर दी है।

दिसंबर 2025 के अंत में कालाडूंगरी क्षेत्र से एक मरीज को लाने के लिए गई 108 एंबुलेंस मरीज को बैठाने के बाद अचानक खराब हो गई। वाहन स्टार्ट नहीं हुआ, जिससे इमरजेंसी स्थिति में अफरा-तफरी मच गई। मरीज की जान खतरे में थी, ऐसे में तुरंत दूसरी 108 एंबुलेंस को मौके पर बुलाया गया। दूसरी एंबुलेंस ने न केवल मरीज को अस्पताल पहुंचाया, बल्कि खराब पड़ी एंबुलेंस को भी खींचते हुए सदर अस्पताल तक ले गई।

यह घटना जिले में एंबुलेंस सेवा की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एंबुलेंसों का रख-रखाव ठीक नहीं होने से ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। यदि समय पर सही हालत में एंबुलेंस न पहुंचे, तो गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग मंचों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा झारखंड में उन्नत चिकित्सा व्यवस्था की बात कही जाती है, मगर बुनियादी इमरजेंसी सेवा ही लचर हो तो मरीजों की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजमी है।

झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा लंबे समय से समस्याओं से जूझ रही है। राज्य भर में कर्मचारियों की हड़तालें, वेतन बकाया और वाहनों की खराब स्थिति की खबरें आम हैं। हाल ही में नवंबर-दिसंबर 2025 का वेतन बकाया होने से कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सरायकेला में भी पहले कई बार हड़तालें हो चुकी हैं, जिससे सेवा प्रभावित हुई है।

 

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