सोनिया गांधी मुश्किल में , दिल्ली कोर्ट ने जारी किया नोटिस: 45 साल पुराना नागरिकता विवाद फिर गर्माया

सोनिया गांधी मुश्किल में , दिल्ली कोर्ट ने जारी किया नोटिस: 45 साल पुराना नागरिकता विवाद फिर गर्माया

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नई दिल्ली, 9 दिसंबर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी को बड़ा कानूनी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सोनिया गांधी पर लगे उस आरोप की जांच के लिए नोटिस भेजा है जिसमें कहा गया है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पहले ही 1980 में वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया था।अतिरिक्त सेशन जज विशाल गोग्ने की अदालत ने यह नोटिस एक रिवीजन याचिका पर जारी किया है। याचिकाकर्ता वकील विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी ने जनवरी 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराया, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता आधिकारिक तौर पर 30 अप्रैल 1983 को मिली थी।

क्या हैं आरोप?

सोनिया गांधी का नाम 1980 में वोटर लिस्ट में शामिल हुआ।
1982 में उनका नाम हटाया गया।
1983 में नागरिकता मिलने से पहले ही फिर से नाम जोड़ा गया।
याचिका में दावा किया गया है कि यह काम फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किया गया।

कोर्ट की कार्रवाई

सितंबर 2025 में ट्रायल कोर्ट (एसीएमएम वैभव चौरसिया) ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह मामला आपराधिक शिकायत का नहीं है और चुनाव आयोग व केंद्र सरकार के दायरे में आता है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की।सोमवार को सुनवाई करते हुए जज विशाल गोग्ने ने याचिका पर विचार करते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने 1980, 1982 और 1983 के इलेक्टोरल रोल्स के मूल दस्तावेज मंगवाए हैं। दोनों पक्षों से जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी।

अभी तक कोई FIR नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अभी सिर्फ नोटिस जारी हुआ है। FIR दर्ज करने या कोई अंतिम फैसला लेने की स्थिति नहीं बनी है। यह प्रक्रिया सिर्फ शिकायत की प्रारंभिक जांच के स्तर पर है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया नहीं

सोनिया गांधी या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस नोटिस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पहले भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं और कांग्रेस इन्हें राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है।यह मामला 45 साल पुराना है और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा है।

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