तनाव से बचाव के लिए अध्यात्म, योग और सकारात्मक सोच जरूरी

सिमडेगा: भागदौड़ भरी जिंदगी, पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक परेशानियां, काम का दबाव और भविष्य की चिंता लोगों में तनाव का कारण बन रही हैं। लगातार बढ़ता तनाव न केवल मानसिक स्वास्थ्य, बल्कि शारीरिक सेहत और पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। राष्ट्रीय तनाव जागरूकता दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने तनाव के कारणों को समय रहते पहचानने और उससे बचाव के लिए अध्यात्म, योग, ध्यान तथा सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी।
कोलेबिरा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सह पुरोहित समाज के विद्या बंधु शास्त्री ने कहा कि तनाव का सामान्य अर्थ खिंचाव या दबाव है। शारीरिक स्तर पर यह खिंचाव के रूप में, जबकि मानसिक स्तर पर चिंता, बेचैनी और असमंजस के रूप में दिखाई देता है। आज की प्रतिस्पर्धात्मक और भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम समस्या बनती जा रही है। इससे बचने के लिए व्यक्ति को उपलब्ध संसाधनों में संतोष रखना चाहिए और खुद को व्यस्त एवं प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए। ध्यान, साधना, मेडिटेशन और मित्रों के साथ समय बिताने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े भाई शिव गुरु ने कहा कि समय और परिस्थितियों के कारण तनाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन अध्यात्म के माध्यम से विचारों को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। गुरु बाबा का सानिध्य, ऑनलाइन नि:शुल्क आध्यात्मिक चिंतन तथा केंद्र में राजयोग और ध्यान का अभ्यास मानसिक शांति एवं आत्मिक संतुलन प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
पतंजलि के जिला कोऑर्डिनेटर देवेंद्र सोनी ने कहा कि नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और शारीरिक सक्रियता तनाव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को शामिल करना चाहिए। सकारात्मक सोच और व्यवस्थित जीवनशैली से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखा जा सकता है।

वहीं, शांति भवन मेडिकल सेंटर के निदेशक सह प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. आलोक राय ने बताया कि तनाव समय और परिस्थितियों के प्रति मन की एक प्रतिक्रिया है। हालांकि, लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसी समस्या के बारे में घंटों सोचते रहने के बजाय उसके समाधान पर ध्यान देना चाहिए। मानसिक परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार तनाव से बचाव के लिए सबसे पहले उसके कारणों को समझना जरूरी है। नियमित योग और व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान, परिवार एवं मित्रों के साथ संवाद और अपनी रुचि के कार्यों के लिए समय निकालना तनाव कम करने में मददगार हो सकता है। यदि लगातार बेचैनी, चिंता या नींद से जुड़ी परेशानी बनी रहती है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। अध्यात्म, योग, सकारात्मक सोच और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

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