कुत्ते के काटने पर राज्य सरकारें देंगी भारी मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी
नई दिल्ली : आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज (13 जनवरी 2026) एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि कुत्ते के काटने से होने वाली हर चोट, गंभीर क्षति या मौत के लिए राज्य सरकारों को भारी मुआवजा (heavy compensation) देना होगा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के मामलों में।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कोर्ट ने पिछले पांच वर्षों में Animal Birth Control (ABC) Rules के लागू न होने पर केंद्र और राज्य सरकारों की जमकर फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “हर कुत्ते के काटने, मौत या चोट के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा तय करेंगे, क्योंकि उन्होंने नियमों के क्रियान्वयन में कुछ नहीं किया। कुत्ते का काटना जीवन भर का प्रभाव छोड़ता है।”
कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी
पीठ ने कुत्तों को सड़कों पर खाना खिलाने वाले लोगों और संगठनों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस नाथ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर आपको कुत्तों से इतना प्यार है, तो उन्हें अपने घर ले जाइए। सड़कों पर क्यों छोड़ते हैं, जहां वे लोगों को काटते और डराते हैं?”
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने मामले को भावुक (emotional) बताते हुए तर्क दिया कि स्टेरलाइजेशन ही समस्या का समाधान है। इस पर बेंच ने जवाब दिया, “भावनाएं अब तक केवल कुत्तों के लिए ही लग रही हैं, इंसानों के लिए नहीं। अगर 9 साल के बच्चे पर कुत्ता हमला करता है, तो जिम्मेदार कौन?” कोर्ट ने साफ कहा कि आवारा कुत्ते किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं। अगर पालतू रखना है, तो लाइसेंस लें।
पिछला आदेश और मौजूदा स्थिति
गौरतलब है कि 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। कुत्तों को स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद शेल्टर में रखने और मूल स्थान पर छोड़ने पर रोक लगाई गई थी। हाल के महीनों में देशभर में कुत्तों के हमलों से कई बच्चे और बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल या मृत हुए हैं। कोर्ट ने इसे प्रशासन की पूरी विफलता (complete failure) करार दिया।
मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से ठोस एक्शन प्लान मांगा है। यह फैसला जन स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन कुत्तों के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती भी बनी हुई है।

















