दुमका के काठीकुंड में आदिवासी छात्रा की संदिग्ध मौत से उबाल: सड़क पर उतरे ग्रामीण, भाजपा ने उठाए कानून-व्यवस्था पर सवाल
नौवीं की 14 वर्षीय छात्रा का घर से करीब 500 मीटर दूर मिला शव, दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका; चार घंटे तक दुमका-पाकुड़ मार्ग जाम, डॉग स्क्वॉड ने जुटाए साक्ष्य
दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका के काठीकुंड में नौवीं कक्षा की एक नाबालिग आदिवासी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। छात्रा का शव गांव के पास झाड़ियों में मिलने के बाद परिजनों, ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में शनिवार को लोगों ने दुमका-पाकुड़ मुख्य मार्ग जाम कर दिया और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बच्चियों की सुरक्षा, पुलिस की जांच और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे बेहद दुखद और शर्मनाक बताते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने और पुलिस की कथित विफलता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, घटना में यौन हिंसा की आशंका जताई गई है, लेकिन दुष्कर्म की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार, मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और मौत की वास्तविक परिस्थितियां जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होंगी।

स्कूल से लौटने के बाद खेत गई थी छात्रा, फिर नहीं लौटी घर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतका कक्षा नौ की छात्रा थी और मधुबन स्थित उच्च विद्यालय में पढ़ती थी। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को वह स्कूल से घर लौटी थी। परिजनों के मुताबिक, दोपहर में भोजन करने के बाद वह खेत की ओर गई थी, जहां मवेशी बंधे थे। उसे मवेशियों को वापस लाने के लिए कहा गया था।कुछ समय बाद मवेशी घर लौट आए, लेकिन छात्रा नहीं पहुंची। इससे परिवार के लोग चिंतित हो गए। पहले परिजनों ने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की। बाद में ग्रामीणों की मदद से आसपास के इलाके में खोजबीन की गई। तलाश के दौरान गांव के पास झाड़ियों में छात्रा का शव मिला। घर से कुछ सौ मीटर की दूरी पर शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी मच गई। परिजनों के लिए यह किसी बड़े सदमे से कम नहीं था।

दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका, पुलिस ने शुरू की जांच
छात्रा का शव जिस परिस्थिति में मिला, उसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने उसके साथ यौन हिंसा किए जाने की आशंका जताई। इसी आशंका के आधार पर मामले में दुष्कर्म और हत्या की चर्चा तेज हुई। घटना की सूचना मिलने के बाद काठीकुंड पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली गई।
10 अक्टूबर को भी घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में जांच की गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने आसपास से एक जोड़ी चप्पल भी जब्त की है। जांच टीम छात्रा के घर से घटनास्थल तक के रास्ते, आसपास के इलाके और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत की वास्तविक वजह और यौन हिंसा से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी। इसलिए अभी किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण और छात्र-छात्राएं
छात्रा की मौत के बाद शनिवार को लोगों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने के बाद ग्रामीणों, परिजनों और छात्र-छात्राओं ने मधुबन चौक के पास दुमका-पाकुड़ मुख्य मार्ग जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि घटना में शामिल आरोपियों की जल्द पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। लोगों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने, छात्रा के पिता को सरकारी नौकरी देने और उसके भाई-बहनों की पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई।
दुमका-पाकुड़ मुख्य मार्ग पर जाम के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। वाहनों की आवाजाही बाधित होने से यात्रियों को परेशानी हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी चिंता दूर नहीं होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने की बातचीत, आश्वासन के बाद हटा जाम
प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, दुमका के एसडीपीओ दिलीप खलखो, काठीकुंड थाना प्रभारी बलराम कुमार सिंह, अंचलाधिकारी ममता मरांडी और प्रखंड विकास पदाधिकारी सौरभ कुमार ने परिजनों एवं ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों ने मामले में कार्रवाई और सरकारी नियमों के तहत परिवार की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। बातचीत के बाद शाम करीब छह बजे सड़क जाम हटा लिया गया।

भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की हस्तक्षेप की मांग
घटना को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दुमका के काठीकुंड में आदिवासी बेटी की मौत बेहद दुखद और शर्मनाक है। भाजपा ने राज्य में बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।बयान में आरोप लगाया गया कि घटना के बाद सुबह से जनता आंदोलन कर रही थी, लेकिन प्रशासन की ओर से अपेक्षित संवाद नहीं हो पाया। भाजपा ने यह भी कहा कि पार्टी नेताओं ने दुमका के पुलिस अधीक्षक से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी।
भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पुलिस अधिकारियों को तत्काल निर्देश देने, आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की है। पार्टी ने पुलिस की कथित विफलता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है।
भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और मामले में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो पार्टी आंदोलन करने को बाध्य होगी।
यह भाजपा का राजनीतिक बयान है।

सबसे बड़ा सवाल: बच्चियों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही
काठीकुंड की घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है। इसने ग्रामीण इलाकों में बच्चियों की सुरक्षा और किसी गंभीर घटना के बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर व्यापक चिंता पैदा की है। एक छात्रा का घर से कुछ सौ मीटर दूर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि छात्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, घटना में कौन शामिल था और क्या इसमें एक या अधिक लोग शामिल थे। इन सवालों के जवाब वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य जांच निष्कर्षों से ही सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही, पीड़ित परिवार की सहायता, उसकी सुरक्षा और भाई-बहनों की शिक्षा से जुड़ी मांगों पर प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पुलिस कितनी जल्दी घटना की गुत्थी सुलझाती है, दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी कब होती है तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। काठीकुंड की इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि बेटियों की सुरक्षा केवल सरकारी दावों या राजनीतिक बयानों से सुनिश्चित नहीं हो सकती।

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