रांची सदर अस्पताल में मारपीट के बाद भी पार्किंग ठेकेदार को राहत, 15 दिन तक जारी रहेगा काम
सुपरवाइजर की पिटाई के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, मरीजों से पार्किंग शुल्क वसूली और ठेके की शर्तों पर भी उठे सवाल
रांची। राजधानी रांची के सदर अस्पताल में पार्किंग विवाद के दौरान सुपरवाइजर के साथ मारपीट की घटना के बाद भी संबंधित ठेकेदार को तत्काल हटाने के बजाय 15 दिनों की मोहलत दी गई है। वहीं, मामले में लोअर बाजार थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग संचालन और मरीजों से कथित तौर पर शुल्क वसूले जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

मारपीट के विरोध में कर्मचारियों का काम ठप
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल परिसर में पार्किंग को लेकर हुए विवाद के दौरान सुपरवाइजर अजीत कुमार के साथ मारपीट की गई। घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना से नाराज अस्पताल के गैर-चिकित्सीय कर्मचारियों ने शनिवार सुबह काम बंद कर दिया। कर्मचारियों ने उपाधीक्षक कार्यालय का घेराव करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इससे अस्पताल के कुछ गैर-चिकित्सीय कार्य प्रभावित हुए। अस्पताल के उपाधीक्षक की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने करीब एक घंटे बाद काम दोबारा शुरू कर दिया।

ठेका समाप्त करने के बजाय 15 दिन की मोहलत
मारपीट की घटना के बाद संबंधित पार्किंग ठेकेदार को हटाने की मांग उठी। हालांकि, सिविल सर्जन कार्यालय में अधिकारियों की बैठक के बाद तत्काल ठेका समाप्त करने के बजाय मौजूदा ठेकेदार को अगले 15 दिनों तक काम जारी रखने की अनुमति दी गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बूटी मोड़ निवासी संवेदक संजीव मिश्रा के पार्किंग ठेके की अवधि एक नवंबर को समाप्त हो रही है। प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर नया टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है। तब तक पार्किंग संचालन की जिम्मेदारी मौजूदा ठेकेदार के पास रहेगी। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि कर्मचारी के साथ मारपीट जैसी गंभीर घटना के बावजूद ठेकेदार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि, ठेका जारी रखने के फैसले के पीछे प्रशासन का आधिकारिक और विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

15.30 लाख रुपये का सालाना ठेका, रोजाना 10 हजार तक वसूली का दावा
सदर अस्पताल की पार्किंग का सालाना ठेका 15 लाख 30 हजार रुपये में दिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अस्पताल परिसर में पार्किंग के नाम पर प्रतिदिन करीब 10 हजार रुपये तक की वसूली होने का दावा किया जा रहा है।
सबसे अहम सवाल मरीजों और उनके परिजनों से पार्किंग शुल्क लिए जाने को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ठेके की शर्तों में मरीजों और उनके परिजनों से शुल्क नहीं लेने का प्रावधान बताया गया है। इसके बावजूद उनसे पैसे वसूले जाने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। यदि ठेके की शर्तों के विपरीत वसूली हो रही है, तो इसकी जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। इसके लिए टेंडर की मूल शर्तों, निर्धारित पार्किंग दरों और शुल्क वसूली से संबंधित शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होगी।

ठेकेदार के कर्मचारी नहीं पहुंचे, सुरक्षा गार्डों ने संभाली व्यवस्था
शनिवार को ठेकेदार के कर्मचारी पार्किंग संचालन के लिए नहीं पहुंचे। इसके बाद अस्पताल के निजी सुरक्षा गार्डों ने व्यवस्था संभाल ली। मुख्य गेट पर गार्ड तैनात किए गए, जबकि हनुमान मंदिर के पास स्थित दूसरा गेट भी खोल दिया गया। बताया गया कि इस दौरान लोगों को बिना पार्किंग शुल्क दिए वाहन खड़े करने की सुविधा मिली। इस घटनाक्रम ने पार्किंग व्यवस्था की जरूरत, संचालन की जिम्मेदारी और मरीजों के लिए शुल्क संबंधी नियमों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, सुरक्षा गार्डों द्वारा अस्थायी रूप से पार्किंग संभालने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि स्थायी पार्किंग व्यवस्था बिना किसी शुल्क या ठेकेदार के आसानी से संचालित हो सकती है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन को अपनी नीति और व्यवस्था स्पष्ट करनी होगी।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
सदर अस्पताल में हुई मारपीट के मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी पार्किंग व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवाल बने हुए हैं। क्या मरीजों और उनके परिजनों से शुल्क वसूले जाने की शिकायतों की जांच होगी? क्या ठेके की शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी? और मारपीट की घटना के बाद ठेकेदार को 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत देने का आधार क्या है? अस्पताल प्रशासन के सामने अब कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पार्किंग शुल्क की पारदर्शिता बनाए रखने और ठेके की शर्तों का पालन कराने की चुनौती है। नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने तक यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा व्यवस्था में शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है और मरीजों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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