मुहर्रम विशेष: कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन की खातिर कुर्बान हुए थे ‘हुसैनी ब्राह्मण’, जानिए क्या है गौरवशाली इतिहास

रांची: मुहर्रम का महीना इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय इस दिन को गम और शहादत के रूप में याद करता है। लेकिन मुहर्रम की इस शहादत गाथा के साथ भारत का एक ऐसा ऐतिहासिक जुड़ाव है, जिससे बहुत कम लोग परिचित हैं। यह कहानी है ‘हुसैनी ब्राह्मणों’ की, जिन्होंने कर्बला की जंग में इमाम हुसैन के प्रति अपनी निष्ठा और शहादत दी थी।
कौन थे हुसैनी ब्राह्मण?
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के अनुसार, कर्बला की जंग में भारतीय मूल के मोहियाल ब्राह्मणों ने इमाम हुसैन का साथ दिया था। इस समूह का नेतृत्व ‘राहिब सिद्ध दत्त’ ने किया था, जो एक मोहियाल ब्राह्मण थे। अपनी वीरता और इमाम हुसैन के प्रति अगाध प्रेम के कारण बाद में उन्हें और उनके वंशजों को ‘हुसैनी ब्राह्मण’ की उपाधि से नवाजा गया।
इमाम हुसैन से क्या था नाता?
किंवदंतियों के अनुसार, राहिब सिद्ध दत्त व्यापार के सिलसिले में अरब जाते रहते थे। वे एक समृद्ध शासक थे, लेकिन संतान न होने के कारण दुखी थे। कहा जाता है कि इमाम हुसैन की दुआ से उन्हें सात पुत्रों का आशीर्वाद मिला। इमाम हुसैन के प्रति कृतज्ञता और उनके प्रति गहरी श्रद्धा के कारण राहिब दत्त ने जीवन भर उनका साथ निभाने का वादा किया था।
जब राहिब दत्त को पता चला कि यजीद की सेना ने कर्बला में इमाम हुसैन को घेर लिया है, तो वे अपनी सेना और सातों बेटों के साथ अरब पहुंचे। हालांकि, उनके पहुंचने से पहले ही इमाम हुसैन शहीद हो चुके थे। इस अपार दुख में राहिब दत्त ने यजीद की सेना के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया और उनके सात पुत्रों ने इमाम हुसैन की शहादत का बदला लेते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
ऐतिहासिक साक्ष्य और प्रमाण
हुसैनी ब्राह्मणों के इस बलिदान के प्रमाण आज भी मिलते हैं।
टी.पी. रसेल: इतिहासकार टी.पी. रसेल ने 1938 में अपनी पुस्तक ‘द हिस्ट्री ऑफ द मुहियाल्स’ (पृष्ठ 42-43) में हुसैनी ब्राह्मणों के इस गौरवशाली इतिहास का विस्तृत वर्णन किया है।
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कर्बला संग्रहालय: कर्बला के संग्रहालय में भी हुसैनी ब्राह्मणों के नाम और उनके बलिदान का उल्लेख मिलता है।
आज के समय में प्रासंगिकता
बंटवारे से पहले हुसैनी ब्राह्मण मुख्य रूप से पंजाब, सिंध और दक्षिण अफगानिस्तान में बसे थे। बंटवारे के बाद ये परिवार भारत आ गए। मोहियाल ब्राह्मणों के इस वंश में कई जानी-मानी हस्तियां शामिल रहीं, जिनमें अभिनेत्री गीता बाली, सुनील दत्त, संजय दत्त, शायर कश्मीरी लाल जाकिर, जनरल जी.डी. बख्शी और रांची के मूर्धन्य पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त जैसे नाम शामिल हैं।
यह कहानी केवल एक धर्म की नहीं, बल्कि उस मानवता की मिसाल है जो मजहबी सरहदों को तोड़कर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और वफादारी का संदेश देती है। आज के दौर में भी ‘हुसैनी ब्राह्मण’ की यह गाथा सांप्रदायिक सौहार्द और साझा विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक बनी हुई है।
वरिष्ठ पत्रकार निलय सिंह के फेसबुक वॉल से
















