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झारखंड विधानसभा में बालू का मुद्दा गुंजा: 100 रुपये में 100 सीएफटी बालू का दावा, विपक्ष बोला – “जमीनी हकीकत कुछ और “

झारखंड विधानसभा में बालू का मुद्दा गुंजा: 100 रुपये में 100 सीएफटी बालू का दावा, विपक्ष बोला – “जमीनी हकीकत कुछ और “

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रांची, 09 दिसंबर  झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को पांकी विधायक शशि भूषण मेहता ने बालू की भयंकर किल्लत और अवैध खनन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले जहाँ एक ट्रैक्टर बालू मात्र 300 रुपये में मिल जाता था, वहीं आज उसकी कीमत 7,000 रुपये तक पहुँच गई है।विधायक ने कहा,
“जेएसएमडीसी ने बालू घाटों के संचालन के लिए एमडीओ (माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर) का चयन बेहद कम दरों पर किया, जिससे राज्य को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। अब बालू आपूर्ति का जिम्मा थानों को दे दिया गया है। थानेदार का काम कानून-व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि बिचौलियों की लिस्ट बनाकर उन्हें बालू पहुँचाना रह गया है। आम जनता ब्लैक में बालू खरीदने को मजबूर है।”जवाब में खनन एवं भूतत्व मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन को बताया,

अवैध खनन से सरकार को नहीं, कुछ अन्य लोगों को फायदा हो रहा है। सरकार जनता को सस्ती बालू देने के लिए कटिबद्ध है। राज्य के 374 बालू घाटों पर 100 घन फीट बालू मात्र 100 रुपये (यानी 1 रुपये प्रति घन फीट) में उपलब्ध कराई जा रही है।”मंत्री के इस दावे पर विधायक शशि भूषण मेहता ने तत्काल पलटवार किया और कहा कि यह व्यवस्था ज्यादातर जिलों में सिर्फ कागजों पर है। कई जगहों पर यह सुविधा या तो शुरू ही नहीं हुई या बेहद सीमित मात्रा में है। जमीनी हकीकत यह है कि लोगों को अभी भी 6,000 से 8,000 रुपये प्रति ट्रैक्टर तक चुकाने पड़ रहे हैं।विधायक ने सरकार से सवाल किया,
“क्या जनता को आसानी से कम कीमत पर बालू दे पाएगी या इसी तरह ब्लैक में खरीदकर अपना मकान बनाना पड़ेगा?”बालू का यह मुद्दा पूरे राज्य, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने वाले लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार तत्काल प्रभाव से पारदर्शी व्यवस्था लागू करे और अवैध खनन पर अंकुश लगाए।सदन में इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ और स्पीकर ने मंत्री को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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