The plight of silicosis victims on Santhal Hool Day

संताल हूल दिवस पर सिलिकोसिस पीड़ितों का दर्द; ओशाज इंडिया ने सरकार से की पुनर्वास नीति में बदलाव की मांग

The plight of silicosis victims on Santhal Hool Day

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नीरज तिवारी / जमशेदपुर

जमशेदपुर: 30 जून : संताल हूल दिवस’ के अवसर पर, ओशाज इंडिया (OSHAJ INDIA), रोशनी और जे.एल.यू. के संयुक्त तत्वावधान में सिलिकोसिस (Silicosis) से जूझ रहे श्रमिकों के लिए न्याय की आवाज बुलंद की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए संस्था ने राज्य सरकार की नीतियों की विफलता और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता पर कड़ा प्रहार किया।

प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल

ओशाज इंडिया के महासचिव समित कुमार कार ने बताया कि सिलिकोसिस पीड़ितों के प्रति सरकार का रवैया बेहद संवेदनशील है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच भेजी गई 400 से अधिक श्रमिकों की डिजिटल एक्स-रे इमेज आज तक जांच नहीं की गई है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का चरम बताया।

प्रमुख मांगें

संस्था ने उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम और माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड को ज्ञापन सौंपकर ये मांगें रखी हैं:

नीति का विस्तार: ‘कारखाना सिलिकोसिस लाभुक सहायता योजना’ का दायरा बढ़ाकर इसमें खानों और असंगठित क्षेत्र (पत्थर तोड़ने, बालू-पत्थर उद्योग आदि) के श्रमिकों को शामिल किया जाए।

निदान की सरलता: किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त चिकित्सक द्वारा की गई सिलिकोसिस की पुष्टि को ‘प्राथमिक पुष्टि’ मानते हुए तत्काल अंतरिम सहायता शुरू की जाए।

मुआवजा और पेंशन: हरियाणा मॉडल की तर्ज पर जीवित पीड़ितों को 5 लाख रुपये और मृतकों के आश्रितों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता व पेंशन दी जाए।

समय-सीमा का खात्मा: आवेदन के लिए 6 माह की कठोर समय-सीमा को समाप्त कर वर्ष 2000 तक के लंबित मामलों पर विचार हो।

हूल दिवस का संकल्प

संताल हूल (क्रांति) के शहीदों को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। ओशाज इंडिया ने स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से श्रमिकों का परीक्षण भी किया। महासचिव समित कुमार कार, जो स्वयं इस बीमारी से संघर्ष कर रहे हैं, ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी तंत्र ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो पीड़ित श्रमिक और उनके संगठन बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

तथ्यों पर एक नजर:

2014-2025 के बीच: 184 श्रमिकों की मृत्यु, 721 जीवित पीड़ित चिन्हित।

सबसे बड़ी चुनौती: एमजीएम अस्पताल में निदान प्रक्रिया का वर्षों से लंबित होना। सिलिकोसिस की पहचान को यांत्रिक प्रक्रिया से हटाकर मानवीय और व्यावहारिक बनाना।

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