CBI कोर्ट का आज का फैसला बना नजीर : CNT एक्ट उलंघन में पहली बार किसी पूर्व मंत्री को सजा । पूर्व मंत्री एनोस एक्का को 7 साल की सजा, पत्नी मेनन समेत 9 अन्य दोषी, सीबीआई कोर्ट का फैसला
CBI कोर्ट का आज का फैसला बना नजीर : CNT एक्ट उलंघन में पहली बार किसी पूर्व मंत्री को सजा । पूर्व मंत्री एनोस एक्का को 7 साल की सजा, पत्नी मेनन समेत 9 अन्य दोषी, सीबीआई कोर्ट का फैसला
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची, 30 अगस्त : झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को रांची की सीबीआई विशेष अदालत ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के उल्लंघन और आदिवासी जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। उनके साथ उनकी पत्नी मेनन एक्का और सात अन्य लोगों को भी दोषी करार दिया गया है। विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार शर्मा की अदालत ने सभी दोषियों को सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के बाद नौ दोषियों को तत्काल हिरासत में ले लिया गया, जबकि एक दोषी, जो वर्तमान में इलाजरत है, को छोड़ दिया गया।
मामले का विवरण: फर्जी पते और पद का दुरुपयोग
सीबीआई की जांच के अनुसार, एनोस एक्का पर आरोप है कि उन्होंने 2006 से 2008 के बीच मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर फर्जी पतों का इस्तेमाल करके आदिवासी जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त की। इस गैर-कानूनी गतिविधि में तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC) कार्तिक कुमार प्रभात और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत थी। इस साजिश के तहत बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीनों का गैर-कानूनी हस्तांतरण किया गया।
मेनन एक्का के नाम पर खरीदी गई जमीन
जांच में सामने आया कि एनोस एक्का ने अपनी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर कई स्थानों पर भारी मात्रा में जमीन खरीदी। इनमें रांची के हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़ से अधिक, नेवरी में 4 एकड़ से अधिक, और चुटिया के सिरम मौजा स्टेशन रोड में 9 डिसमिल जमीन शामिल हैं। यह सारी खरीदारी मार्च 2006 से मई 2008 के बीच की गई थी। सीबीआई ने पाया कि इन लेनदेन में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया और CNT एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।
सीबीआई की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 4 अगस्त 2010 को एनोस एक्का और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच पूरी होने के बाद दिसंबर 2012 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया। 5 नवंबर 2019 को एनोस एक्का समेत सभी आरोपियों पर आरोप तय किए गए। इसके बाद सीबीआई ने सबूत और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत का फैसला
सीबीआई विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का को सात साल की सश्रम कारावास की सजा और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अन्य सात दोषियों, जिनमें तत्कालीन LRDC कार्तिक कुमार प्रभात भी शामिल हैं, को भी सजा और जुर्माना लगाया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला आदिवासी समुदाय के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, जिसने सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को नुकसान पहुंचाया।
एनोस एक्का का राजनीतिक सफर
एनोस एक्का झारखंड के प्रमुख आदिवासी नेताओं में से एक रहे हैं। वे झारखंड पार्टी के संस्थापक थे और 2005 से 2009 तक अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा की सरकारों में ग्रामीण विकास और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे। हालांकि, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध जमीन हस्तांतरण के कई आरोपों ने उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल किया।
प्रतिक्रियाएँ और सामाजिक प्रभाव
इस फैसले का आदिवासी समुदाय और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है। आदिवासी अधिकार मंच के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह फैसला आदिवासी जमीनों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो कानून को ताक पर रखकर आदिवासी हितों के साथ खिलवाड़ करते हैं।” दूसरी ओर, एनोस एक्का के समर्थकों ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि वे इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

















