निशिकांत दुबे का नया दांव ..UGC नियम को 'मोदी गारंटी' बताकर सवर्णों को बहलाने की कोशिश ! लेकिन X के कमेन्ट में दिखा लोगो का गुस्सा। 

निशिकांत दुबे का नया दांव ..UGC नियम को ‘मोदी गारंटी’ बताकर सवर्णों को बहलाने की कोशिश ! लेकिन X के कमेन्ट में दिखा लोगो का गुस्सा। 

निशिकांत दुबे का नया दांव ..UGC नियम को ‘मोदी गारंटी’ बताकर सवर्णों को बहलाने की कोशिश ! लेकिन X के कमेन्ट में दिखा लोगो का गुस्सा। 

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निशिकांत दुबे का नया दांव ..UGC नियम को 'मोदी गारंटी' बताकर सवर्णों को बहलाने की कोशिश ! लेकिन X के कमेन्ट में दिखा लोगो का गुस्सा। 

 

रांची : लोकसभा सांसद और BJP के प्रमुख चेहरों में से एक डॉ. निशिकांत दुबे ने X पर एक पोस्ट कर UGC के नए नियम का बचाव किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि यह नियम किसी भी जाति-धर्म के साथ भेदभाव नहीं करता और आर्टिकल 14 की भावना का पालन है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी की “गारंटी” करार दिया।पोस्ट में दुबे ने लिखा, “10 प्रतिशत आरक्षण गरीबों के देने वाले के खिलाफ कौन? … UGC साफ कह रही है कि किसी भी समाज, जाति, वर्ग, धर्म या संप्रदाय के तौर पर कोई भेदभाव नहीं होगा। बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान के आर्टिकल 14 की मूल भावना का सम्मान मोदी गारंटी है।”

हालांकि, UGC के इस नए नोटिफिकेशन/ड्राफ्ट नियम को लेकर सवर्ण और जनरल कैटेगरी में भारी विरोध देखने को मिल रहा है।

निशिकांत दुबे के पोस्ट के निचे कमेन्ट में यूजर्स ने किस लिखा देखिए …

एक यूजर अभिषेक तिवारी ने लिखा …

निशिकांत जी आपका बेटा इंग्लैंड में पढ़ाई करता है!
इसलिए आपको UGC से कोई दिक्कत नहीं है!

लेकिन गरीब सवर्ण के बच्चे तो भारत में हैं, इसलिए आप आवाज़ उठाइये!
लिखिये

एक यूजर  अभिनव मिश्रा ने लिखा, “2023 का ये नोटिफिकेशन क्यों दिखा रहे है आप, अभी 2026 चल रहा है।

एक यूजर अभिनव राजपूत ने लिखा ..

UGC document
Clause 3(c)

एक यूजर लक्ष्य शर्मा ने नया डॉक्युमेंट डालते हुए लिखा ..#ShameOnUGC
2023 की रेगुलेशन क्यों दिखा रहा है ?
2026 की भी पढ़ो साफ साफ लिख रहा जातिगत भेदभाव केवल ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के साथ माना जाएगा , सामान्य वर्ग के साथ नहीं ।
पुराना रेगुलेशन दिखा के पागल मत बनाओ
आर्टिकल 14 चिल्ला रहा है ।

एक यूजर डॉ सचिन त्रिपाठी ने लिखा ..निशिकांत डूबे
डूबने वाली बात कर दी
2026 प्रावधान में स्पष्ट है
sc st obc छोड़कर सबको दंड दिया जाएगा
इन्हें छोड़कर— सवर्ण ही हैं!

“चाहे कुछ भी हो, पीड़ित हमेशा SC/ST/OBC ही माना जाएगा और अपराधी हमेशा सामान्य वर्ग का छात्र ही माना जाएगा”

ये कौनसा समानता का अधिकार है?
#ShameOnUGC

UGC नियम पर वापस लिया जाएगा या यह विवाद और बढ़ेगा? समय बताएगा, लेकिन दुबे का यह पोस्ट राजनीतिक बहस को और गरमा रहा है।

एक यूजर डॉ आशुतोष ने लिखा ..दस पर्सेंट आर्थिक आधार पर है।एससी-एसटी ओबीसी आरक्षण को भी आर्थिक पर लेकर आइये।यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बिल की लिस्ट में एससी-एसटी ओबीसी के साथ जनरल कैटेगरी भी जोड़ दीजिये ,युनिवर्सिटी की इक्विटी कमेटी में सामान्य प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से रहेगा ऐसा नियम भी बनाए । कब करेंगे ऐसा ?

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