क्यों है हेमंत सोरेन का मास्टर स्ट्रोक पेसा कानून जानिए ,अब 27 नहीं पुरे 28 सीटों पर कब्ज़ा हो जायेगा !
क्यों है हेमंत सोरेन का मास्टर स्ट्रोक पेसा कानून जानिए ,अब 27 नहीं पुरे 28 सीटों पर कब्ज़ा हो जायेगा !
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!झारखंड में, 23 दिसंबर 2025 को ने पेसा कानून को मंजूरी दी है। यह नियम राज्य के 15 जिलों में अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होंगे, जहां ग्राम सभाओं को मजबूत अधिकार मिलेंगे। अब मंजूरी मिलने से पेसा का पूर्ण नियम शुरू होगा, जो आदिवासियों के लिए एक बड़ा कदम है। बीजेपी ने इसकी सराहना की है, लेकिन पांचवी अनुसूची से विचलन न करने की चेतावनी दी है।
यह नियम आदिवासियों को भूमि, वन और विकास पर अधिक नियंत्रण देंगे, और कुछ गांवों ने पहले ही स्वयं पेसा लागू करने की पहल की थी।
देसी-विदेशी शराब की दुकान ग्राम सभा की अनुमति के बाद ही खुलेगी। किसी भी हाल में निर्णयों की अवहेलना कर शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी।
घर में हुई चोरी, मवेशी चोरी और सामान्य अपराधों की सुनवाई ग्राम सभा करेगी। किसी की जमीन पर कब्जे की कोशिश, हल्की मारपीट जैसे अपराधों की शिकायत मिलने पर ग्राम सभा उसकी सुनवाई करेगी। दो हजार रुपए तक जुर्माना भी कर सकेगी।
पंचायतों में चल रहे स्कूल या स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन पर भी ग्राम सभा हस्तक्षेप कर सकता है। शिक्षकों, चिकित्सकों, पारा मेडिकल कर्मियों की अनुपस्थिति पर ग्राम सभा कार्रवाई की अनुशंसा करेगी।
एक एकड़ से कम वाले जल क्षेत्र पर ग्राम सभा का नियंत्रण होगा। ग्राम सभा ही इस क्षेत्र में मछली पालन का निर्णय करेगी। उस तालाब से निकली मछली के उपयोग का फैसला भी ग्राम सभा ही करेगी।
राज्य के अनुसूचित जिलों की पंचायतों की ग्राम सभाओं की शक्ति और दायित्व बढ़ जायेगा ,पंचायत क्षेत्रों में खनन, जमीन अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी ,ग्राम सभा को लघु वनोपज के उपयोग, स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, जल संसाधन प्रबंधन के अधिकार होंगे।
इसमें ग्राम सभाओं के परिसीमन का प्रावधान भी शामिल होगा इसे जिला प्रशासन अधिसूचित करेगा। हलाकि अनुसूचित जिलों के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर पेसा नियमों का प्रभाव नहीं होगा , अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार-स्वायत्तता मिलेगी। जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत होगी। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में निर्णय प्रक्रिया ज्यादा लोकतांत्रिक बनेगी। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय सहभागिता बढ़ेगी।
वैसे झारखण्ड में रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, साहेबगंज, दुमका, पाकुड़, जामताड़ा जिले में पेसा कानून लागु होगा। इसके साथ ही पलामू जिले के सतबरवा ब्लॉक के रबदा और बकोरिया पंचायत, गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी और बोरिजोर ब्लॉक में यह कानून लागू होगा।
पेसा कानून (Panchayats Extension to Scheduled एरियाज Act, 1996) भारत में अनुसूचित क्षेत्रों (Fifth Schedule Areas) में लागू होता है, जहां आदिवासी समुदायों की बहुलता है। यह कानून आदिवासियों को स्थानीय स्वशासन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है।
10 राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों को अधिसूचित किया गया है, जहां पेसा के प्रावधान आदिवासियों को विशेष अधिकार देते हैं। हालांकि, सभी राज्यों ने अपने स्तर पर पेसा नियम पूरी तरह लागू नहीं किए हैं; उदाहरण के लिए, 8 राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना ने अपने पेसा नियम बना लिए हैं, जबकि झारखंड और ओडिशा का पेसा कानून जल्द ही आपको पटल पर देखने को मिलेगा।।

















