Hearing in the case of Shell Company, Mining Lease and MNREGA

हेमंत सोरेन से जुडी शेल कंपनी और मामले की अगली सुनवाई 30 जून को Hearing in the case of Shell Company, Mining Lease and MNREGA

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Hearing in the case of Shell Company, Mining Lease and MNREGA

झारखण्ड हाई कोर्ट में आज शेल कंपनी , खनन लीज और मनेरगा ( Shell Company, Mining Lease and MNREGA)  मामले में सुनवाई हुई करीब तीन घंटे से ज्यादा चले इस सुनवाई के बाद कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 30 जून को तय की है।  सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा है, जिसपर 11 जुलाई को सुनवाई होनी है. 11 जुलाई तक हाईकोर्ट समय दें. मुख्यमंत्री हेमंत का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने 11 जुलाई तक हाईकोर्ट से इंतजार करने की मांग की. इस पर कोर्ट ने कहा की आप सुपरम कोर्ट से स्टे आर्डर ले आइये। अगली सुनवाई वर्चुअल ही होगी।

 सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि  माइनिंग लीज मामले में हेमंत सोरेन का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने वकालतनामा फाइल नहीं किया है. कोर्ट ने इसी गंभीरता से लिया. साथ ही कहा कि जब वकालतनामा फाइल नहीं की गई थी तब आप पक्ष कैसे रख सकते हैं. दो दिनों के भीतर अधिवक्ता को सभी एफिडेविट कोर्ट को सौंपने का निर्देश दिया गया है.

 जानिए क्या है पूरा मामला 

 शेल कंपनी

इस मामले में भी शिव शंकर शर्मा ने ही अधिवक्ता राजीव कुमार के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है. याचिका के माध्यम से आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए राजधानी रांची के चर्चित बिजनेसमैन रवि केजरीवाल, रमेश केजरीवाल एवं अन्य को दिया जाता है. यह पैसा 24 कंपनियों के माध्यम से दिया जा रहा है और इन कंपनियों के माध्यम से ब्लैक मनी को वाइट मनी बनाया जा रहा है. इसलिए याचिका के माध्यम से अदालत से जांच की मांग की गई है. सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स से पूरी संपत्ति की जांच की मांग की गई है. इस मामले में झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, सीबीआई, ईडी, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन, रवि केजरीवाल, रमेश केजरीवाल, राजीव अग्रवाल एवं अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है.

 माइनिंग लीज मामला : 

याचिका झारखंड हाई कोर्ट में सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ 11 फरवरी को जनहित याचिका दायर की गयी है. प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जिम्मे खनन और वन पर्यावरण विभाग भी हैं. उन्होंने स्वंय पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया और खनन पट्टा हासिल की. ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि अधिनियम का उल्लंघन है. इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआइ से जांच कराई जाए. प्रार्थी ने याचिका के माध्यम से हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की है.

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