Lohardagga News:-मां को पटक-पटक कर मार डालने के बाद बच्चे के रोने की आवाज सुनकर बख्शी जान

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Drishti  Now  Ranchi

झारखंड के लोहरदगा में सोमवार सुबह झुंड से छूटे हाथी ने दो महिलाओं समेत चार ग्रामीणों को कुचल कर मार डाला. हाथी के हमले के 2 दिन बाद अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है. हाथी ने कई घरों को तहस-नहस कर दिया है। साथ ही फसलों को भी नुकसान हुआ है। जहां हाथियों का डर लोगों को जगाने पर मजबूर कर देता है। वन विभाग की टीम भी हर समय हाथियों की हरकतों पर पैनी नजर रख रही है।

कासपुर गांव की चांदमणि उरैन अपने 2 माह के बच्चे के साथ सुबह शौचालय गई। सूंड में लिपटा हाथी ने मां और बच्चे को जमकर पीटा। परिणामस्वरूप चंदमणि का निधन हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक जमीन पर गिरा दो माह का शिशु रो रहा था। जब वह हाथी के बगल में खड़ा था, तो उसे बदबूदार गंध देने से उसकी जान बच गई। इसके बाद हाथी जंगल की ओर बढ़ गया।

कासपुर के चार टोंगरी निवासी सोमवार की सुबह पेशाब करने के लिए बाहर गए थे तभी हाथी ने उन्हें मार डाला. घटना भांडरा थाना क्षेत्र के कासपुर गांव की है. मरने वालों में लालमोहन महतो (65), राजेश लोहरा की पत्नी नेहा देवी (20) और गणेश कुजूर (30) शामिल हैं। मरने वालों में जीतराम उरांव की पत्नी चंदमणि उरांव उर्फ ​​झालो (28) भी शामिल है।

लालमोहन महतो शौच  के लिए बाहर निकले। उसने हाथी की सूंड पर प्रहार करने के लिए एक छड़ी का इस्तेमाल किया, जिससे हाथी भाग गया। बूढ़े लालमोहन को हाथी ने उठा लिया, जमीन पर पटक दिया और कुचल कर मार डाला।

नेहा देवी घर से निकली थी और तोंगरी की ओर जा रही थी। नेहा ने हाथी को देखा तो वह तुरंत भागने लगी। हाथी ने पीछा कर नेहा को तुरंत ही मार डाला और उसे पकड़ लिया। गणेश कुजूर को दिन में एक हाथी ने जमीन पर गिरा दिया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।

झुंड से भटकने वाले हाथी ज्यादा घातक: वन अधिकारी

जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि हाथी झुंड से भटक गया है, इसलिए ज्यादा घातक है। वन विभाग के 20 कर्मी स्थिति को कंट्रोल करने में लगे हुए हैं। इसके अलावा रांची से भी विभागीय टीम भी पहुंची है। हाथी को भगाने के लिए बांकुड़ा बंगाल से दल बुलाया गया है।

उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि हाथी के साथ छेड़छाड़ नहीं करें। इससे वह ज्यादा एग्रेसिव हो जाता है।

8 फरवरी को पहली बार शहर में घुसा था हाथी, 3 की ले ली थी जान

दुमका से गिरिडीह के रास्ते एक हाथी 8 फरवरी को हजारीबाग में घुसा था। बताया गया था कि हजारीबाग में चार महीने पहले 13 हाथियों का दल शहरी क्षेत्र से सटे मासीपीढ़ी वभैनवे पहाड़ पहुंचा था। गांव के लोग अलर्ट थे, इसके बावजूद हाथी शहर से सटे खिरगांव में दो लोगों की जान ले ली। खेत पहुंचे किसान बुधन फसल खा रहे हाथी को नहीं देख सके थे।

हाथी ने पहले बुधन को हाथी ने चपेट में लिया। इसके बाद शोर सुनकर पहुंचे बाबू साव, जब बुधन को चपेट में लेता देखा वो शोर मचाने लगा तो हाथी उनकी ओर दौड़ा, भागने का प्रयास भी किया। लेकिन, अंधेरे में तेजी से नहीं भाग सका और खेत में गिर गया।हाथी ने उसे भी पटककर जान ले ली। करीब दो घंटे तक हाथी उसके शव के समीप ही रहा। इसके अलावा एक युवती को भी हाथी ने बुरी तरह जख्मी कर दिया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।

3 महीने पहले हुई थी नेहा की शादी, चांदमणि को दो महीने का बेटा

नेहा देवी की लव मैरिज 3 महीने पहले ही हुई थी। वहीं, चांदमणि उराईंन का 2 महीने का दुधमुंहा बच्चा समेत चार बच्चे हैं। इस घटना के बाद गांव वाले घरों में पूरे दिन दुबके रहे। कुछ लोग गांव से भाग गए।

वहीं, कुडू थाना क्षेत्र के सलगी में झुंड से भटककर आए हाथी ने मसियातू गांव की महिला मुनिया देवी को कुचलकर मार डाला था। ग्रामीण उसे लेकर बसारडीह हॉस्पिटल गए थे, लेकिन इलाज के क्रम में महिला ने दम तोड़ दिया।

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