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राँची में फिर जमीन में हेर फेर ! अनिल टाइगर की मौत के बाद नहीं बंद हुआ कांके अंचल में जमीनों के हेर फेर का धंधा !काँके अंचलाधिकारी पर अवैध जमाबंदी का गंभीर आरोप

राँची में फिर जमीन में हेर फेर ! अनिल टाइगर की मौत के बाद नहीं बंद हुआ कांके अंचल में जमीनों में गलत जमाबंदी का धंधा !काँके अंचलाधिकारी पर अवैध जमाबंदी का गंभीर आरोप पीड़ित परिवार पर हमला, उपायुक्त से कार्रवाई की मांग

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पीड़ित को न्याय नहीं मिलने पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उपायुक्त रांची को लिखा खत और अंचलाधिकारी को बर्खास्त करने की मांग की

राँची, 16 मई : झारखंड की राजधानी राँची के काँके अंचल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम लोगों के बीच आक्रोश भी पैदा कर रहा है।

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बाबूलाल मरांडी का पत्र और पीड़ित के जमीन का पेपर

दरअसल पिठोरिया के दर्जी मुहल्ला निवासी मुस्तफा खलीफा ने काँके अंचलाधिकारी (C.O.) जय कुमार राम पर गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने निजी स्वार्थ और लेन-देन के आधार पर उनकी पुश्तैनी जमीन की अवैध तरीके से दोहरी जमाबंदी कर दी। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, क्योंकि जमीन दलालों ने विवादित भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की और विरोध करने पर पीड़ित परिवार पर लाठी-डंडों से हमला किया गया।
क्या है पूरा मामला?
मुस्तफा खलीफा की पुश्तैनी जमीन, जो मौजा-पिठोरिया, थाना नं.-09, खाता नं.-355, प्लॉट नं.-786, 425, 256 में दर्ज है, का कुल रकबा 4.49 एकड़ है। यह जमीन खतियान और रजिस्टर पंजी-II में हनीफ खलीफा के नाम से दर्ज है। लेकिन आवेदक का आरोप है कि C.O. जय कुमार राम ने 03/04/2025 को इस जमीन की दोहरी जमाबंदी सलीमा खातून के नाम कर दी, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। हैरानी की बात यह है कि हल्का कर्मचारी ने इस जमाबंदी की अनुशंसा से इनकार किया और अपनी आपत्ति रजिस्टर में दर्ज होने की बात कही।
जमीन दलालों का खेल और हिंसा
मामला यहीं नहीं रुका। C.O. के आदेश पर लगान रसीद जारी होने के बाद गाँधीनगर, काँके निवासी अनिल राम और मो. शहीद जैसे जमीन दलालों ने विवादित जमीन पर कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी। जब भू-स्वामी मुस्तफा और उनके परिवार ने इसका विरोध किया, तो उन पर लाठी-डंडों से हमला किया गया। इस हमले में परिवार के सदस्य घायल हो गए, जिनका इलाज अभी भी चल रहा है।
न्यायालय में लंबित है मामला
इस जमीन से जुड़ा वाद (सं.-50/2024) अनुमंडल न्यायालय में पहले से लंबित है, और अदालत ने यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। इसके बावजूद C.O. द्वारा की गई कार्रवाई ने न केवल अदालत के आदेश की अवमानना को दर्शाया, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।
उपायुक्त से कार्रवाई की मांग
मुस्तफा खलीफा को जब न्याय नहीं मिला तो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जिले के कलेक्टर मंजूनाथ भजंत्री को एक पत्र लिखा है  आवेदन में उपायुक्त, राँची से माँग की है कि C.O. जय कुमार राम के कथित कुकृत्यों की गहन जाँच की जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने पर अंचलाधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने और इस मामले को नजीर बनाने की अपील की है, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी इस तरह का दुस्साहस न कर सके।
सोशल मीडिया पर चर्चा
यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। लोग इस घटना को प्रशासनिक भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बता रहे हैं।

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