ट्रंप के टैरिफ युद्ध से वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल: भारत, चीन और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियां!

ट्रंप के टैरिफ युद्ध से वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल: भारत, चीन और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियां!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। विशेष रूप से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को तनावपूर्ण किया है, बल्कि भारत, चीन और रूस के बीच एक नए गठजोड़ की संभावनाओं को भी बल दिया है। यह बदलाव वैश्विक व्यवस्था में एक नए ध्रुव के उदय का संकेत दे रहा है।

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भारत पर टैरिफ का झटका

राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए पहले 25% और फिर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया, जो 27 अगस्त से प्रभावी होगा। ट्रंप ने इसे रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की आर्थिक मदद करने का आरोप लगाते हुए “सेकेंडरी सैंक्शंस” का हिस्सा बताया। भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक” करार देते हुए कहा कि उसका तेल आयात 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है।

भारत-चीन-रूस: एक नया गठजोड़?

ट्रंप की नीतियों ने भारत, चीन और रूस को एक साझा मंच पर ला खड़ा किया है। भारत और चीन, जो ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के प्रति अविश्वास रखते हैं, अब अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। रूस ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए रूस-भारत-चीन (RIC) ढांचे को पुनर्जनन देने की कोशिश शुरू की है। हाल के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और चीन ने रूसी तेल आयात के अपने अधिकार का बचाव किया है, जिसे विश्लेषकों ने एक “शांत समन्वय” के रूप में देखा है।

वैश्विक व्यवस्था पर प्रभाव

ट्रंप की टैरिफ नीति का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके अनपेक्षित परिणाम सामने आ रहे हैं। भारत, जो अमेरिका का 12वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और जिसके साथ 2024 में 129 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, अब रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठजोड़, भले ही औपचारिक नहीं है, ट्रंप की नीतियों के खिलाफ एक सामरिक स्वायत्तता की खोज है।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह किसानों और देश के हितों की रक्षा के लिए किसी भी कीमत को चुकाने को तैयार हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत रूसी तेल आयात को धीरे-धीरे कम कर सकता है, लेकिन वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में समय लगेगा।

आर्थिक प्रभाव

टैरिफ के कारण भारत के टेक्सटाइल, समुद्री और चमड़ा निर्यात क्षेत्रों पर भारी असर पड़ सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 50% टैरिफ भारत की जीडीपी वृद्धि को प्रभावित करेगा। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आश्वासन दिया है कि जब तक जवाबी टैरिफ नहीं लगाए जाते, भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।

चीन, जो रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, पर अभी तक अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया गया है, जिसे भारत ने दोहरे मापदंड के रूप में देखा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि चीन पर भी जल्द ही समान कार्रवाई हो सकती है। इस बीच, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने भी ट्रंप की नीतियों की आलोचना की है, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ गई है।

ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को तनावपूर्ण किया है, बल्कि भारत, चीन और रूस को एक नई भू-राजनीतिक रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया है। यह बदलाव वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिसमें RIC ढांचा एक नया विकल्प बन सकता है। आने वाले महीने इस नए गठजोड़ की दिशा और वैश्विक व्यवस्था पर इसके प्रभाव को और स्पष्ट करेंगे।

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