आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बाबरी मस्जिद विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी: ‘वोट बैंक की राजनीति के लिए पुराना झगड़ा दोबारा शुरू नहीं होना चाहिए’

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बाबरी मस्जिद विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी: ‘वोट बैंक की राजनीति के लिए पुराना झगड़ा दोबारा शुरू नहीं होना चाहिए’

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बाबरी मस्जिद विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी: ‘वोट बैंक की राजनीति के लिए पुराना झगड़ा दोबारा शुरू नहीं होना चाहिए’

कोलकाता/नई दिल्ली, 21 दिसंबर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा ‘बाबरी मस्जिद’ की आधारशिला रखने के मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भागवत ने इसे वोट बैंक की राजनीति करार देते हुए कहा कि अयोध्या का विवाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खत्म हो चुका है और इसे दोबारा शुरू करना न तो हिंदुओं के हित में है और न ही मुसलमानों के।कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा,
“सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर अपना फैसला दे दिया है। अब फिर से बाबरी मस्जिद का नाम लेकर विवाद खड़ा करना एक राजनीतिक साजिश है। यह सब वोट बैंक के लिए किया जा रहा है। ऐसा करके न हिंदू समाज का भला हो रहा है, न मुस्लिम समाज का। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन धर्म और समाज हमेशा रहता है।”भागवत ने आगे कहा कि संघ का काम राजनीति नहीं, बल्कि समाज सेवा और हिंदू समाज की एकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं, जो किसी के हित में नहीं है।

कहानी पूरी एक नजर में…

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने हाल ही में एक कार्यक्रम में ‘बाबरी मस्जिद’ की आधारशिला रखने की घोषणा की थी। इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कई विपक्षी नेताओं ने इसे मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने की कोशिश बताया था।2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमा सकता है।

आरएसएस प्रमुख के बयान को इस संदर्भ में देखा जा रहा है कि वे इस तरह की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम एकता के खिलाफ मानते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया था राम मंदिर निर्माण कार्य तेजी से जारी, 2024 में प्राण प्रतिष्ठा पूरी हो चुकी है

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