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जमीन के नीचे कोयला, आसमान में ड्रोन और गांव में बगावत! लातेहार में NTPC की सर्वे टीम को ग्रामीणों ने क्यों घेरा?

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गुलेल से गिराया ड्रोन, सात घंटे तक नहीं निकलने दिया रास्ता; ग्रामसभा की अनुमति के बिना सर्वे कराने के आरोप ने खोल दी विकास परियोजनाओं के सामने बड़ी चुनौती

लातेहार: झारखंड के गांवों में अब जमीन का विवाद सिर्फ खेतों और कागजात तक सीमित नहीं रह गया है। कभी जमीन की नापी होती है, तो कभी आसमान से ड्रोन उड़ाकर सर्वे किया जाता है। लेकिन जब गांव के लोगों को ही इसकी जानकारी और प्रक्रिया पर भरोसा न हो, तो तकनीक भी विवाद की वजह बन जाती है। ऐसा ही नजारा लातेहार के बालूमाथ प्रखंड के गेरेनजा-हराफू गांव में देखने को मिला। 4 नवंबर को NTPC की टीम जमीन का सर्वे करने पहुंची थी। टीम ड्रोन के जरिए सर्वे कर रही थी। ग्रामीणों को यह तरीका नागवार गुजरा। उनका आरोप था कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना गांव की जमीन का सर्वे कराया जा रहा है।
फिर जो हुआ, उसने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने गुलेल से निशाना साधकर ड्रोन को नीचे गिरा दिया। मामला इतना बढ़ा कि NTPC के तीन अधिकारियों और तीन अन्य कर्मियों को ग्रामीणों ने करीब सात घंटे तक रोके रखा।

जमीन के नीचे कोयला, आसमान में ड्रोन और गांव में बगावत! लातेहार में NTPC की सर्वे टीम को ग्रामीणों ने क्यों घेरा?

जब ड्रोन बना ग्रामीणों के गुस्से का निशाना

ग्रामीणों की नाराजगी केवल एक उड़ते हुए ड्रोन को लेकर नहीं थी। उनके विरोध के पीछे जमीन, ग्रामसभा की भूमिका और प्रस्तावित परियोजना को लेकर उठ रहे सवाल थे। ग्रामीण जानना चाहते थे कि आखिर उनकी जमीन का सर्वे किस उद्देश्य से किया जा रहा है और इसके लिए गांव की सहमति कहां है?

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गांववालों के साथ मीटिंग..

सात घंटे तक चला समझाने-बुझाने का दौर

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों से बातचीत और समझाने-बुझाने का सिलसिला चला। आखिरकार कंपनी की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद टीम के सभी छह सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

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असली सवाल: विकास किसकी सहमति से?

लातेहार की यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है। कोयला और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत हो सकती है, लेकिन क्या स्थानीय ग्रामीणों को विश्वास में लिए बिना सर्वे और दूसरी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकती हैं ग्रामसभा की भूमिका, जमीन पर पारंपरिक अधिकार और परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों की चिंताओं को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।