साहब फील्ड में है – दिव्यांग अमित कुमार की व्यथा: 3 बार 30 किमी सफर, फिर भी नहीं मिली बैटरी ट्राईसाइकिल, 6 महीने से पेंशन बंद, देखे वीडियो

साहब फील्ड में है – दिव्यांग अमित कुमार की व्यथा: 3 बार 30 किमी सफर, फिर भी नहीं मिली बैटरी ट्राईसाइकिल, 6 महीने से पेंशन बंद, देखे वीडियो

साहब फील्ड में है – दिव्यांग अमित कुमार की व्यथा: 3 बार 30 किमी सफर, फिर भी नहीं मिली बैटरी ट्राईसाइकिल, 6 महीने से पेंशन बंद, देखे वीडियो

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साहब फील्ड में है – दिव्यांग अमित कुमार की व्यथा: 3 बार 30 किमी सफर, फिर भी नहीं मिली बैटरी ट्राईसाइकिल, 6 महीने से पेंशन बंद, देखे वीडियो

गोड्डा जिले में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर, दिव्यांगजनों की मदद पहुंचने में लगातार देरी और लापरवाही

गोड्डा (झारखंड), 20 जनवरी :झारखंड के गोड्डा जिले में एक दिव्यांग युवक की पीड़ा ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झिलवा पंचायत के दामा गांव निवासी अमित कुमार मंडल पिछले एक महीने में तीन बार करीब 25-30 किलोमीटर का कठिन सफर तय करके सदर प्रखंड कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी।उनकी मांग सिर्फ एक बैटरी से चलने वाली ट्राईसाइकिल या इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर की थी, जो उनके दैनिक जीवन को आसान बना सकती है।

लेकिन अधिकारी बार-बार यही जवाब देते रहे – “साहब फील्ड में हैं”। अमित कुमार मंडल का शरीर भले ही उनकी मदद न कर पाता हो, लेकिन उनका हौसला आज भी सिस्टम से सवाल पूछने की ताकत रखता है। उनकी दिव्यांग पेंशन पिछले 6 महीनों से बंद पड़ी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है। परिवार की जिम्मेदारियां और दैनिक जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल हो गया है।

झारखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग के तहत दिव्यांगजनों को मुफ्त या सब्सिडी पर बैटरी ऑपरेटेड ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, क्रचेज आदि सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।

गोड्डा जैसे जिलों में क्रियान्वयन में बार-बार देरी, अधिकारी की अनुपस्थिति और ब्यूरोक्रेटिक अड़चनें सामने आ रही हैं।

यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां कई लोग इसे शेयर कर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक वीडियो में अमित जी खुद अपनी व्यथा बता रहे हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि कितनी मुश्किल से वे प्रखंड कार्यालय तक पहुंच पाते हैं।

यह सिर्फ अमित कुमार मंडल की कहानी नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में दिव्यांगजनों के साथ हो रही उपेक्षा का प्रतीक है। सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की यह खाई कितनी गहरी है, यह कहानी उसकी बानगी भर है।

झारखंड में दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण की योजनाएं

झारखंड सरकार समाज कल्याण विभाग के तहत दिव्यांगजन सशक्तिकरण योजनाएं चलाती है, जिसमें:बैटरी ऑपरेटेड ट्राईसाइकिल (Motorized Tricycle)
व्हीलचेयर, क्रचेज, हियरिंग एड आदि सहायक उपकरण मुफ्त/सब्सिडी पर दिए जाते हैं।
ALIMCO (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) के माध्यम से कैंप लगाए जाते हैं, जहां 60%+ दिव्यांगता वाले पात्र लाभार्थी आवेदन कर सकते हैं।

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