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झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर साधा निशाना, कहा- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस-यूके यात्रा से सीखें, ट्रोलिंग छोड़ें

रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस (विश्व आर्थिक मंच) और यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक यात्रा उच्च स्तरीय स्वीकृति से हो रही है। यह यात्रा न केवल भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के बाद यूके पहुंचने वाला पहला राज्य बनने की उपलब्धि है, बल्कि झारखंड के वैश्विक मंच पर गर्वपूर्ण प्रतिनिधित्व का प्रतीक भी है।

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विनोद कुमार पाण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री पूरी तैयारी और स्पष्ट उद्देश्य के साथ दावोस में अंतर-मंत्रालयी पैनल में भाग ले रहे हैं, जहां झारखंड ऊर्जा परिवर्तन मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। इसके बाद यूके में ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट (ऑक्सफोर्ड) में व्याख्यान दिया गया, जो दुनिया के प्रमुख गवर्नेंस संस्थानों में से एक है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री को ऑल सोल्स कॉलेज और सेंट जॉन कॉलेज में आधिकारिक मान्यता मिली—वही सेंट जॉन कॉलेज जहां झारखंड के ‘मरांग गोमके’ जयपाल सिंह मुंडा ने शिक्षा प्राप्त की थी।

झामुमो नेता ने बाबूलाल मरांडी को ‘मित्रवत सलाह’ देते हुए कहा, “उन्हें व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फॉरवर्ड मैसेज से आगे बढ़कर सोचना चाहिए। ट्रोल की तरह व्यवहार करने के बजाय दावोस और यूके मोर्चे पर राज्य सरकार के प्रयासों से सीखें। जलन और नकारात्मक राजनीति छोड़कर ग्लोबल मंच पर झारखंड के प्रतिनिधित्व पर गर्व करें—यही जिम्मेदार विपक्ष की पहचान है।”

यह यात्रा झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है और राज्य पहली बार WEF दावोस में भाग ले रहा है। झामुमो ने इसे दूरदर्शी नेतृत्व और सक्षम शासन की मिसाल बताया, जो बयानबाजी नहीं बल्कि ठोस प्रयासों से हासिल होती है।

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