दामोदर की धारा मोड़कर बरनी घाट पर अवैध माइनिंग का खेल: पेयजल योजना ठप्प, सरयू राय ने सदन में उठाया मुद्दा
दामोदर की धारा मोड़कर बरनी घाट पर अवैध माइनिंग का खेल: पेयजल योजना ठप्प, सरयू राय ने सदन में उठाया मुद्दा
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सरयू राय ने दामोदर घाटी के बरनी घाट पर अवैध माइनिग को लेकर विधानसभा में मुद्दा उठाया । उन्होंने कहा की अवैध माइनिग के लिए नदी की धारा तक को मोड़ दिया है ।
सरयू राय ने सदन की कार्यवाही के दौरान विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के जवाब पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा की सरकार से जहाँ ‘पिन-पॉइंट’ पर जवाब माँगा, तो पूरी तरह गलत और भ्रामक जवाब दिया गया । सरयू राय ने मंत्री से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
सरयू राय ने सदन में कहा की इस अवैध कृत्य की जानकारी जिला प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी थी।
सूचना की अनदेखी: उपायुक्त (DC), एसएसपी और माइनिंग अधिकारियों को सूचना दी गई थी।लेकिन कोई जांच नही हुई।
उन्होंने पूछा की अवैध खनन रोकने के लिए बनाई गई टास्क फोर्स मौके पर सक्रिय क्यों नहीं हुई।
निरीक्षण का अभाव: सरयू राय ने पूछा की विभागीय अधिकारियों ने आखिर उस विशिष्ट स्थान (Pin-point) का भौतिक निरीक्षण क्यों नहीं किया जहाँ नदी का स्वरूप बदला जा रहा था? और ये गलत जवाब दे दिया।
हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया । की उनकी बातों का विस्तार से रिपोर्ट देखा जाएगा। उचित कार्यवाही होगी ।
लेकिन जाहिर है की दामोदर नदी की धारा को फिर से पुराने स्वरूप में लाना और माइनिंग माफियाओं पर नकेल कसना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि जल्द ही ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो यह न केवल एक प्राकृतिक आपदा को आमंत्रण देगा बल्कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी दाग लगाएगा।
सरयू राय ही नही बल्कि पूरे पब्लिक के अनुसार कोयलांचल की जीवनरेखा कही जाने वाली दामोदर नदी इन दिनों खनन माफियाओं के निशाने पर है। बरनी घाट के पास माइनिंग के लिए नदी की प्राकृतिक धारा को ही मोड़ दिया गया है। इस गंभीर मामले को लेकर अब सियासत और जन-आक्रोश दोनों उबल रहे हैं।
अंधाधुंध माइनिंग से प्यासे ग्रामीण
सरयू राय के अनुसार नदी की धारा मोड़े जाने का सबसे भयावह असर स्थानीय ग्रामीण पेयजल परियोजना पर पड़ा है। धारा बदलने के कारण पंप हाउस तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है, जिससे हजारों ग्रामीणों के सामने जल संकट खड़ा हो गया है। सरयू राय का आरोप है कि माइनिंग के चक्कर में न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया जा रहा है, बल्कि उनके बुनियादी हक ‘पानी’ को भी छीना जा रहा है।

















