दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में AAP को बड़ी राहत: केजरीवाल और सिसोदिया बरी, कोर्ट ने कहा- CBI के पास ठोस सबूत नहीं
दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में AAP को बड़ी राहत: केजरीवाल और सिसोदिया बरी, कोर्ट ने कहा- CBI के पास ठोस सबूत नहीं
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली, 27 फरवरी — दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज कथित दिल्ली आबकारी (शराब) नीति घोटाले से जुड़े CBI मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कुल 23 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि CBI द्वारा पेश किए गए सबूत आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे और कोई आपराधिक साजिश (criminal conspiracy) साबित नहीं हुई।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि:प्रॉसिक्यूशन (CBI) आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या पर्याप्त प्रमाण नहीं पेश किया गया।
जांच में गंभीर कमियां थीं और फेयर ट्रायल के लिए फेयर जांच जरूरी है।
कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ।
यह फैसला 12 फरवरी को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद सुरक्षित रखे गए निर्णय के रूप में आया। CBI ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और बाद में कई पूरक चार्जशीट जमा कीं।
एजेंसी का आरोप था कि 2021-22 की रद्द की गई एक्साइज पॉलिसी से “साउथ लॉबी” को फायदा पहुंचाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का कथित लेन-देन हुआ था। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य इन दावों को सपोर्ट नहीं करते और यहां तक कि प्राइमा फेसी केस भी नहीं बनता।
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए और मीडिया से बातचीत में रोते हुए कहा, “मैं भ्रष्ट नहीं हूं। अदालत ने कह दिया है कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ईमानदार हैं। मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है।” उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने कहा, “सच की हमेशा जीत होती है।”यह फैसला AAP के लिए बड़ी कानूनी और राजनीतिक जीत माना जा रहा है।
जाहिर है केजरीवाल और सिसोदिया को 2024 में ED और CBI ने गिरफ्तार किया था, जिससे पार्टी को काफी नुकसान हुआ था।

उल्लेखनीय है कि ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस अलग चल रहा है, लेकिन मुख्य CBI एक्साइज पॉलिसी केस में यह क्लीन चिट मिलना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है।कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों (जिनमें K. कविता और विजय नायर जैसे अन्य शामिल हैं) को डिस्चार्ज कर दिया, जिससे CBI जांच को बड़ा झटका लगा है। अब देखना यह है कि CBI इस फैसले के खिलाफ अपील करती है या नहीं।
















