ईरान ने युद्ध के बीच लिया बड़ा फैसला: मोज्तबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर
तेहरान : अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे घातक संघर्ष के बीच ईरान ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। ईरान की एक्सपर्ट्स असेंबली (Assembly of Experts) ने सोमवार को अयातुल्ला सैय्यद मोज्तबा होसैनी खामेनेई को इस्लामी गणतंत्र ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया है। यह फैसला उनके पिता, दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह लेने के लिए लिया गया है, जिनकी मौत युद्ध के पहले ही दिन अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में हो गई थी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एक्सपर्ट्स असेंबली, जिसमें 88 वरिष्ठ मौलवी शामिल हैं, ने आधी रात के बाद जारी एक आधिकारिक बयान में कहा, “एक निर्णायक वोट से विशेषज्ञों की सभा ने अयातुल्ला सैय्यद मोज्तबा होसैनी खामेनेई को इस्लामी गणतंत्र ईरान की पवित्र व्यवस्था के तीसरे नेता के रूप में नियुक्त किया है।” यह ऐलान तेहरान समय के अनुसार सोमवार की आधी रात के बाद किया गया, जो युद्ध शुरू होने के ठीक एक सप्ताह बाद आया है।
56 वर्षीय मोज्तबा खामेनेई एक मध्यम दर्जे के मौलवी हैं, लेकिन वे ईरान के सुरक्षा बलों (IRGC) और अपने पिता के विशाल व्यापारिक नेटवर्क में गहरी पकड़ रखते हैं। वे लंबे समय से सुप्रीम लीडर पद के संभावित उत्तराधिकारी माने जाते रहे हैं। इस बार युद्ध की स्थिति में उनकी नियुक्ति कट्टरपंथी तत्वों की मजबूती का स्पष्ट संकेत देती है। राज्य मीडिया ने उन्हें “अयातुल्ला” के पद से संबोधित किया है, जो उनकी धार्मिक योग्यता को दर्शाता है।
इस नियुक्ति से पहले अमेरिका और इजरायल ने ईरान को चेतावनी दी थी कि बिना उनकी मंजूरी के नए लीडर का चयन युद्ध को और भड़काएगा। इजरायल ने स्पष्ट कहा था कि कोई भी नया लीडर उनके लिए वैध टारगेट होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मोज्तबा खामेनेई को “अस्वीकार्य” करार दिया था और कहा था कि वे उत्तराधिकारी चुनने में शामिल होना चाहते हैं। इसके बावजूद ईरान ने अपना फैसला सुना दिया, जो तेहरान में हार्डलाइनरों के दबदबे को दिखाता है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित कई शीर्ष नेता मारे गए। यह हमला ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के साथ-साथ लीडरशिप को खत्म करने का प्रयास था। ईरान ने जवाबी हमले किए, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा गया है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
यह कदम ईरान की ओर से साफ संदेश है कि वह युद्ध के बावजूद अपनी व्यवस्था को मजबूत रखने और कट्टर नीतियों पर अडिग रहने का इरादा रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोज्तबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान और अधिक आक्रामक रुख अपना सकता है, जिससे युद्ध लंबा खिंच सकता है।

















