The word 'Masjid' has been removed from Bhojshala, ending a 21-year-old legal dispute.

भोजशाला से हटाया गया ‘मस्जिद’ शब्द, 21 साल पुराना कानूनी विवाद खत्म

The word 'Masjid' has been removed from Bhojshala, ending a 21-year-old legal dispute.
The word ‘Masjid’ has been removed from Bhojshala, ending a 21-year-old legal dispute.

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर पिछले 21 वर्षों से चला आ रहा कानूनी विवाद अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नया शासकीय आदेश जारी करते हुए परिसर के आधिकारिक नाम से ‘मस्जिद’ शब्द हटा दिया है। अब यह स्थल केवल “भोजशाला” के नाम से जाना जाएगा।

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अब तक सरकारी और कानूनी दस्तावेजों में इस परिसर को “भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद” के रूप में दर्ज किया जाता था। ASI के ताजा आदेश के बाद इस नाम में बड़ा बदलाव किया गया है। आदेश के अनुसार अब हिंदू श्रद्धालुओं को साल के 365 दिन बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना और धार्मिक अध्ययन का अधिकार मिलेगा।

दरअसल, 7 अप्रैल 2003 को जारी ASI के आदेश के तहत हिंदुओं की पूजा को केवल मंगलवार तक सीमित कर दिया गया था, जबकि शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी जाती थी। हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद 2003 की यह व्यवस्था पूरी तरह निरस्त कर दी गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब हिंदू श्रद्धालु पूरे वर्ष मां वाग्देवी की पूजा, अनुष्ठान और शास्त्रों का अध्ययन कर सकेंगे। वहीं शुक्रवार की नमाज से जुड़ी पूर्व व्यवस्था भी स्वतः समाप्त मानी जा रही है।

भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र रही है। हाई कोर्ट के आदेश और ASI की नई अधिसूचना के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

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