Allegations of Sexual Exploitation of Female Prisoner at Birsa Munda Jail

झारखंड: बिरसा मुंडा जेल में महिला कैदी के यौन शोषण के आरोप से मचा हड़कंप, बाबुलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

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Allegations of Sexual Exploitation of Female Prisoner at Birsa Munda Jail
रांची, 17 May : झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा जेल (होटवार जेल) एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला पत्र लिखा है। इस पत्र में जेल प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारियों पर एक असहाय महिला कैदी के यौन शोषण, उसे गर्भवती करने और पूरे मामले को प्रशासनिक स्तर पर दबाने के सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। नेता प्रतिपक्ष द्वारा लिखे गए इस पत्र के बाद राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

जेल के भीतर ‘संस्थागत अपराध’ का आरोप

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया है कि उन्हें पूरी तरह सत्यापित और विश्वसनीय आंतरिक प्रशासनिक स्रोतों से यह अकाट्य सूचना मिली है। पत्र के अनुसार, न्याय-अभिरक्षा (Judicial Custody) में रखी गई एक महिला कैदी का वहाँ के सर्वोच्च पद पर बैठे काराधीक्षक (Jail Superintendent) द्वारा लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया, जिसके चलते वह वर्तमान में गर्भवती है। विपक्ष ने इसे आपके शासनकाल की पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी प्रशासनिक नियंत्रण व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है।

मामला रफा-दफा करने में जुटे शीर्ष अधिकारी!

पत्र में केवल काराधीक्षक ही नहीं, बल्कि जेल विभाग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि इस जघन्य मामले पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के बजाय प्रशासनिक तंत्र इसे दबाने में जुट गया है।

पत्र के मुख्य अंश:

“प्राप्त पुख्ता सूचनाओं के अनुसार, स्वयं कारा महानिरीक्षक (IG Prisons) इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने, फाइलों को गायब करने और दोषी काराधीक्षक को हर प्रकार का प्रशासनिक संरक्षण देने के षड्यंत्र में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। जेल के भीतर लंबे समय से एक संगठित और समानांतर आपराधिक साम्राज्य फल-फूल रहा है।”

विपक्ष का आरोप है कि जेल के अधीनस्थ कर्मचारियों और गवाहों का मुंह बंद रखने के लिए भारी धनराशि और रिश्वत बांटी जा रही है।

फॉरेंसिक साक्ष्य मिटाने और गवाहों को हटाने की साजिश

पत्र में विषय की भयावहता का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि वर्तमान में इस अपराध के वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों को पूरी तरह विलोपित करने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।

साक्ष्य मिटाने का प्रयास:

पीड़ित गर्भवती महिला कैदी को बीमारी के झूठे बहाने बनाकर निरंतर जेल परिसर से बाहर गुप्त स्थानों और चिकित्सालयों में ले जाया जा रहा है, ताकि अवैध चिकित्सकीय हस्तक्षेप के जरिए फॉरेंसिक साक्ष्यों को नष्ट किया जा सके।

गवाहों का तबादला:

जेल के भीतर अधिकारियों की इन अवैध गतिविधियों को देखने वाले कुछ महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाहों को सोची-समझी रणनीति के तहत रातों-रात स्थानांतरित (Transfer) और पदमुक्त कर दिया गया है।

विपक्ष की अल्टीमेटम और सीधी चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस कुकृत्य के मुख्य सूत्रधार काराधीक्षक और साक्ष्य मिटाने वाले कारा महानिरीक्षक के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कोई प्रत्यक्ष और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह स्वतः सिद्ध हो जाएगा कि इस गहरे संस्थागत भ्रष्टाचार में राज्य के शीर्ष अधिकारी सीधे तौर पर भागीदार हैं। विपक्ष ने दोनों दोषी अधिकारियों को तुरंत सेवामुक्त कर सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।

प्रशासन और सरकार के रुख का इंतजार

इस गंभीर और संवेदनशील पत्र के सामने आने के बाद अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) या जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। चूंकि यह मामला सीधे तौर पर जेल सुरक्षा और महिला कैदी के मानवाधिकारों से जुड़ा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और तेज होने के आसार हैं।

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