Allegations of distributing fake certificates in the name of providing jobs, administration starts investigation

नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट बांटने का आरोप, प्रशासन ने शुरू की जांच

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Allegations of distributing fake certificates in the name of providing jobs, administration starts investigation
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शंभू कुमार सिंह 

सिमडेगा: जिले में बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर कथित रूप से फर्जी सर्टिफिकेट बांटने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। प्लस टू हाई स्कूल सिमडेगा के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में छात्रों से शुल्क लेकर नौकरी दिलाने और एंट्रेंस परीक्षा पास कराने का दावा किए जाने की शिकायत पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, “राम गोविंद ग्रुप कॉलेज” के नाम से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान संस्था की ओर से नौकरी उपलब्ध कराने तथा विभिन्न परीक्षाओं में सफलता दिलाने संबंधी दावे किए गए। उपस्थित लोगों को संस्था की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर कुछ छात्रों और अभिभावकों ने इसकी शिकायत कोलेबिरा प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी से की।

शिकायत मिलने के बाद राकेश कोनगाड़ी ने मामले की जानकारी कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी को दी। विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने प्रतिनिधि मोहम्मद शमी आलम को जांच के लिए मौके पर भेजा। प्रारंभिक जांच में कई तथ्य संदिग्ध पाए जाने के बाद प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।

उपायुक्त के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), अंचल अधिकारी (सीओ) और थाना प्रभारी की टीम कार्यक्रम स्थल पहुंची और जांच शुरू की। अधिकारियों ने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों एवं अभिभावकों से पूछताछ की तथा संस्था से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि छात्रों से ₹200 की राशि ली गई थी। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद छात्रों से वसूली गई राशि वापस कराई गई। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने राहत महसूस की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासनिक टीम के पहुंचते ही कार्यक्रम से जुड़े तीन लोग मौके से फरार हो गए, जबकि तीन अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संस्था के दावे कितने सही हैं और कहीं नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी तो नहीं की जा रही थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर कुछ लोग युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई जरूरी है ताकि युवाओं का आर्थिक और मानसिक शोषण रोका जा सके।

फिलहाल जिला प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं। संस्था की वैधता, जारी किए गए सर्टिफिकेटों की प्रमाणिकता और नौकरी दिलाने के दावों की सत्यता की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी या जालसाजी की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Drishti Now Desk

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