निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का हल्ला बोल: जमशेदपुर में प्रदर्शन, राज्य स्तरीय नीति बनाने की मांग
नीरज तिवारी
जमशेदपुर: निजी विद्यालयों द्वारा हर साल पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करने और मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि करने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। जमशेदपुर के बारीडीह गोल चक्कर पर अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार से निजी स्कूलों की लूट पर लगाम लगाने की मांग की है।
क्या है मुख्य समस्या?
अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल हर साल पाठ्यक्रम बदलकर अभिभावकों को नई और महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। इसके साथ ही, री-एडमिशन शुल्क और बिल्डिंग फंड के नाम पर ली जाने वाली मोटी रकम ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की कमर तोड़ दी है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बबलू झा ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बना दिया गया है और अभिभावक पिस रहे हैं।
अभिभावकों की प्रमुख मांगें:
समान पुस्तक नीति: CBSE, ICSE और राज्य बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों में एक ही बोर्ड के तहत समान पाठ्यपुस्तकें लागू हों, ताकि किताबों के नाम पर हो रही लूट बंद हो।
अतिरिक्त शुल्कों पर रोक: री-एडमिशन, बिल्डिंग फंड और अन्य छिपे हुए शुल्कों को पूरी तरह बंद किया जाए।
राज्य स्तरीय नीति: राज्य सरकार एक स्पष्ट नीति बनाए और एक ऐसा निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) विकसित करे जो निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगा सके।
नुक्कड़ नाटक के जरिए जगाया विरोध
विरोध को अनोखा रूप देते हुए अभिभावकों ने बारीडीह गोल चक्कर पर नुक्कड़ नाटक का मंचन किया और भिक्षाटन कर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा और इसे पूरे राज्य में विस्तार दिया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के अधिकार और पारदर्शिता के लिए यह जरूरी है कि निजी स्कूलों की फीस संरचना सार्वजनिक हो और जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर पर नियमित ऑडिट की व्यवस्था हो।
अब देखना यह है कि क्या सरकार अभिभावकों की इस जायज मांग को गंभीरता से लेती है या अभिभावकों को इस आर्थिक बोझ तले और संघर्ष करना पड़ेगा।

















