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झारखंड से दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों की पीड़ा: ZRUCC सदस्य सतीश सिन्हा ने उठाई आवाज, टीटीई की मनमानी पर जताई गहरी नाराजगी

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रांची: झारखंड से दक्षिण भारत (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि) जाने वाले यात्रियों के लिए सफर इन दिनों किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं है। रोजी-रोजगार, शिक्षा और बेहतर इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग दक्षिण भारत का रुख करते हैं, लेकिन ट्रेनों की भारी कमी और रेलवे के कर्मचारियों की मनमानी के कारण उन्हें नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (ZRUCC) के सदस्य सतीश सिन्हा ने दक्षिण पूर्व रेलवे प्रशासन के समक्ष तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।

स्लीपर क्लास बना जनरल कोच, यात्री बेहाल

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सतीश सिन्हा ने अपनी शिकायत में विशेष रूप से धनबाद-अल्लापूजा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 13351) का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि रांची स्टेशन पर उन्होंने स्वयं देखा कि स्लीपर कोच में पहले से ही पैर रखने की जगह नहीं थी, बावजूद इसके टीटीई द्वारा दर्जनों यात्रियों को EFT (Excess Fare Ticket) बनाकर स्लीपर कोच में प्रवेश दे दिया गया।

सिन्हा ने कहा, “भीड़ इतनी अधिक हो जाती है कि यात्रियों का शौचालय तक जाना असंभव हो जाता है। स्लीपर कोच की स्थिति जनरल कोच से भी बदतर हो गई है। यात्रियों से पैसा लेकर उन्हें भेड़-बकरियों की तरह कोच में भरना पूरी तरह से अनैतिक और असुरक्षित है।”

टीटीई की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

जब सतीश सिन्हा ने संबंधित टीटीई से इस मनमानी को लेकर सवाल किया, तो उन्हें कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब बोगी में बैठने या खड़े होने तक की जगह नहीं है, तो फिर नियम विरुद्ध EFT क्यों काटा जा रहा है? उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और संबंधित दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

दक्षिण भारत के लिए ट्रेनों की कमी

ZRUCC सदस्य ने रेल प्रशासन को याद दिलाया कि रांची से दक्षिण भारत के लिए ट्रेनों की संख्या नाममात्र है। झारखंड की बढ़ती आबादी और दक्षिण भारत की ओर बढ़ते पलायन को देखते हुए वर्तमान ट्रेनें नाकाफी हैं।

उन्होंने मांग की है कि:

रांची से दक्षिण भारत के लिए और अधिक ट्रेनें चलाई जाएं।
मौजूदा ट्रेनों में कोच की संख्या बढ़ाई जाए।
त्योहारी सीजन और नियमित दिनों में ट्रेनों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

सतीश सिन्हा ने इस मामले को रेलवे की आधिकारिक बैठकों में भी प्रमुखता से रखा है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह यात्रियों के विश्वास को चोट पहुंचाने जैसा होगा।
अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन ZRUCC सदस्य की इस चेतावनी के बाद धनबाद-अल्लापूजा एक्सप्रेस सहित अन्य दक्षिणगामी ट्रेनों की स्थिति में सुधार के लिए क्या कदम उठाता है।

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