Crackdown on NGOs receiving foreign funding

विदेशी चंदा लेने वाले NGOs पर सख्ती: FCRA नियमों में बड़े बदलाव, सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

Crackdown on NGOs receiving foreign funding

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

डेस्क : भारत सरकार ने विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) पर निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। गृह मंत्रालय (MHA) ने 22 जून 2026 को FCRA (Amendment) Rules, 2026 अधिसूचित किए, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

ये बदलाव NGOs को अधिक जवाबदेह बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और विदेशी फंड के दुरुपयोग (खासकर धर्मांतरण गतिविधियों) को रोकने के उद्देश्य से किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि आलोचक इसे सिविल सोसाइटी पर अंकुश मान रहे हैं।

मुख्य बदलाव क्या हैं?कार्यों का विस्तृत और स्पष्ट विवरण अनिवार्य

अब NGOs को अपने कार्यों को सामान्य श्रेणियों (जैसे शिक्षा, आदिवासी कल्याण) में नहीं लिखना होगा। उन्हें predefined Schedule से विशिष्ट उद्देश्य चुनने होंगे और बारीकी से बताना होगा कि वे किस तरह का काम कर रहे हैं।

धर्मांतरण (Proselytization) पर सख्त रोक

विदेशी फंड से religious education, preservation of faith traditions या  indigenous belief systems से जुड़ी गतिविधियों में धर्म परिवर्तन (conversion) संबंधी कार्य नहीं किए जा सकेंगे। कल्याण, शिक्षा और चैरिटी कार्य बिना conversion के अनुमत रहेंगे।

विदेशी नागरिकों को महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिबंध

विदेशी नागरिकों (भारतीय मूल के कुछ अपवादों को छोड़कर) को NGOs के प्रमुख पदों (key functionaries) पर नियुक्ति सामान्यतः स्वीकृत नहीं होगी।

अंतिम दानकर्ताओं (Ultimate Donors) का खुलासा

मध्यस्थ फंड्स या Donor Advised Funds से धन आने पर अंतिम दानकर्ताओं का नाम और विवरण सरकार को देना अनिवार्य होगा।

सोशल मीडिया अकाउंट अनिवार्य

हर FCRA पंजीकृत NGO को अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाना और नियमित रूप से अपने कार्यों की जानकारी अपडेट करनी होगी।

जमीन पर काम और मूल्यांकन

विदेशी धन का उपयोग स्वीकृत उद्देश्यों पर ground-level कार्यों के लिए ही करना होगा। सरकार समय-समय पर NGOs के कार्यों का मूल्यांकन करेगी। न्यूनतम खर्च (जैसे ₹10 लाख वार्षिक) का प्रावधान भी है।

निष्क्रिय NGOs का लाइसेंस रद्द

लंबे समय से मैदान स्तर पर काम न करने वाले या केवल पंजीकरण रखने वाले NGOs का FCRA लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा।

आलोचकों का पक्ष:

कुछ NGOs, विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये नियम overly restrictive हैं, जो वैध सामाजिक कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं।ये बदलाव उन NGOs पर लागू होंगे जो विदेशी चंदा लेते हैं (वर्तमान में करीब 15,000-16,000 सक्रिय पंजीकरण)। सभी संगठनों को नए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, अन्यथा पंजीकरण प्रभावित हो सकता है।

Also Read :

रांची में चैन स्नैचिंग की कोशिश नाकाम, एक आरोपी लोगों के हत्थे चढ़ा

ओलंपिक दिवस पर सिमडेगा को बड़ी सौगात, राष्ट्रीय हॉकी कैंप के लिए पुष्पा मांझी और संदीपा कुमारी का चयन

सीबीएसई 12वीं बोर्ड: डीपीएस बोकारो के आदित्य बने साइंस में नेशनल टॉपर, पुनर्मूल्यांकन में रचा इतिहास

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now