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गोड्डा के संविदा जूनियर इंजीनियर को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नियुक्ति रद्द करने का आदेश रद्द

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने गोड्डा जिले में संविदा पर नियुक्त जूनियर इंजीनियर सौरभ कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियुक्ति रद्द करने का आदेश निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि नियुक्ति रद्द करने से पहले अभ्यर्थी को न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया, न ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया और न ही जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। ऐसे में पूरी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

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मामला वर्ष 2016 में जिला पंचायत राज कार्यालय, गोड्डा द्वारा निकाली गई संविदा जूनियर इंजीनियर भर्ती से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौरभ कुमार की नियुक्ति 16 दिसंबर 2016 को की गई थी और उन्होंने 23 दिसंबर 2016 को योगदान भी दे दिया था। इसके बाद 19 जनवरी 2017 को जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने यह कहते हुए उनकी नियुक्ति रद्द कर दी कि उनके अनुभव प्रमाणपत्र में त्रुटि पाई गई है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर नियुक्ति रद्द की गई, उसकी प्रति भी याचिकाकर्ता को उपलब्ध नहीं कराई गई। बिना नोटिस और बिना सुनवाई के किसी कर्मचारी के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

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अदालत ने यह भी माना कि नियुक्ति उपायुक्त-सह-जिला चयन समिति के अध्यक्ष द्वारा की गई थी, जबकि उसे रद्द करने का आदेश जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने जारी किया, जो नियुक्ति प्राधिकारी से अधीनस्थ अधिकारी हैं। इसलिए यह आदेश अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) की दृष्टि से भी अवैध है।

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कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अनुभव प्रमाणपत्र में आखिर क्या त्रुटि थी। बिना कारण बताए केवल प्रमाणपत्र को दोषपूर्ण बताकर नियुक्ति समाप्त करना उचित नहीं माना जा सकता।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने 18/19 जनवरी 2017 का नियुक्ति रद्द करने का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही मामले को उपायुक्त, गोड्डा के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि यदि वर्ष 2016 की भर्ती योजना अभी भी प्रभावी है तो याचिकाकर्ता के अनुभव प्रमाणपत्र का विधिसम्मत सत्यापन किया जाए। यदि प्रमाणपत्र विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप पाया जाता है तो उन्हें नियुक्ति प्रदान की जाए। पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

फैसले की अहम बातें

बिना शो-कॉज नोटिस नियुक्ति रद्द करना अवैध।

जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराए बिना कार्रवाई नहीं की जा सकती।

नियुक्ति रद्द करने का अधिकार नियुक्ति प्राधिकारी या उससे उच्च अधिकारी को ही है।

आदेश कारणयुक्त (Reasoned Order) होना आवश्यक है।

उपायुक्त, गोड्डा को आठ सप्ताह के भीतर नया निर्णय लेने का निर्देश।

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