सीएजी रिपोर्ट ने खोली हेमंत सरकार की विफलताओं की पोल : बाबूलाल मरांडी

रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएजी रिपोर्ट को लेकर हेमंत सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने राज्य सरकार की प्रशासनिक अक्षमता, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। गरीबों के आवास, ग्रामीण रोजगार और हर घर तक नल से जल पहुंचाने जैसी बुनियादी योजनाओं में भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार विकास को लेकर केवल लंबी-लंबी बातें करती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने कहा कि सरकार के अपने आंकड़े ही उसकी कार्यप्रणाली की पोल खोल रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जल जीवन मिशन में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में टेंडर प्रक्रिया और काम की गति को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई निविदाओं में बेहद कम प्रतिस्पर्धा रही और कुछ मामलों में अनुमानित लागत से अधिक दर पर काम दिए गए। उन्होंने कहा कि सीएजी ने ऐसे संवेदक को अलग-अलग निविदाओं के माध्यम से करीब 148 करोड़ रुपये के काम दिए जाने पर सवाल उठाया, जिसकी निविदा क्षमता नकारात्मक थी। उन्होंने कहा कि रांची-पूर्वी और खूंटी प्रमंडल की निविदाओं में केवल दो बोलीदाता थे। जांच में दोनों के डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे जाने की बात सामने आई, जिससे मिलीभगतपूर्ण बोली के संकेत मिलते हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में देरी का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में राज्य सरकार की देरी का खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ा। उनके अनुसार, लक्ष्य और लाभार्थियों को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार योजना से बाहर रह गए।
मनरेगा में 40 से 55 दिन की देरी
मनरेगा को लेकर भी उन्होंने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि योजना के लिए निधियां 40 से 55 दिनों की देरी से जारी की गईं, जबकि मनरेगा का उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने दावा किया कि सीएजी की जांच में ऐसे खर्च भी सामने आए, जिन्हें योजना के तहत स्वीकार्य नहीं माना गया।

बजट और केंद्र की राशि खर्च करने में विफलता का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को भी उजागर किया है। उनके अनुसार, 31 मार्च 2025 तक 1,60,565 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। वहीं, वर्ष 2024-25 के 1,50,938.84 करोड़ रुपये के बजट में 31,110 करोड़ रुपये यानी 20.61 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिली 1,916.63 करोड़ रुपये की राशि में से 596.02 करोड़ रुपये यानी 31.10 प्रतिशत राशि बिना उपयोग के पड़ी रही। यह स्थिति बताती है कि राज्य सरकार उपलब्ध राशि का समय पर उपयोग करने और खर्च का समुचित हिसाब देने में विफल रही है।

छात्रों के आंदोलन को लेकर भी सरकार पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबूलाल मरांडी ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्रों के आंदोलन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देर रात रांची के डीसी और एसएसपी ने धरनास्थल पर पहुंचकर छात्रों को धमकाया। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की कमेटी बनाई है। यदि कमेटी छात्रों से बातचीत नहीं कर सकती है तो उसे भंग कर दिया जाना चाहिए।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट केवल अलग-अलग योजनाओं की कमियां नहीं बताती, बल्कि सरकार की पूरी प्रशासनिक और वित्तीय कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि गरीबों को घर नहीं मिल रहा, ग्रामीणों को समय पर रोजगार नहीं मिल रहा और हर घर तक पानी पहुंचाने की योजना भी गंभीर अनियमितताओं से घिरी हुई है।
उन्होंने राज्य सरकार से सीएजी रिपोर्ट में उठाए गए सवालों का जनता के सामने जवाब देने और प्रत्येक वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे और अधिकारों के साथ लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार, मृत्युंजय शर्मा और के.के. गुप्ता भी मौजूद रहे।















