Left parties' protest in Jharkhand against the MMDR Amendment Bill; copies to be burnt from August 25 to 31.

झारखंड में MMDR संशोधन विधेयक के खिलाफ वाम दलों का आंदोलन, 25 से 31 अगस्त तक जलाएंगे प्रतियां

Left parties' protest in Jharkhand against the MMDR Amendment Bill; copies to be burnt from August 25 to 31.
Left parties’ protest in Jharkhand against the MMDR Amendment Bill; copies to be burnt from August 25 to 31.

रांची: भाकपा माले, सीपीएम और सीपीआई ने गुरुवार को झारखंड कार्यालय में संयुक्त प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार द्वारा पारित MMDR संशोधन विधेयक का विरोध किया। वाम दलों ने आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए राज्यों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। इसका सीधा असर झारखंड के राजस्व और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ने की आशंका है।

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भाकपा माले के मनोज भक्त ने कहा कि झारखंड पहले से कई संकटों से गुजर रहा है। ऐसे समय में MMDR संशोधन विधेयक के जरिए खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व पर राज्य के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खनन भूमि पर लगने वाले उपकर से संबंधित अधिकार राज्य सरकार से वापस लेने की कोशिश झारखंड के लिए आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान साबित होगी।

उन्होंने कहा कि भूमि और उस पर कर लगाने का अधिकार राज्यों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय है। राज्य के राजस्व का बड़ा स्रोत उसके हाथ से निकलने पर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण की योजनाएं प्रभावित होंगी। इसका सबसे अधिक असर आदिवासी, दलित और कमजोर वर्गों पर पड़ने की आशंका है।

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मनोज भक्त ने कहा कि वाम दल विधेयक के खिलाफ व्यापक आंदोलन करेंगे और झारखंड के हित में खड़ी सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र के सामने मजबूती से झारखंड का पक्ष रखने की मांग की। प्रकाश विप्लव ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में जिस तरीके से MMDR संशोधन विधेयक पारित किया गया, वह केंद्र सरकार की नीतियों की दिशा को स्पष्ट करता है। उन्होंने इसकी तुलना किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से की।

उन्होंने बताया कि छह वामपंथी पार्टियों की बैठक में विधेयक के खिलाफ आंदोलन का निर्णय लिया गया है। 25 से 31 अगस्त तक पूरे झारखंड में विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। गांवों और शहरों में सभाएं आयोजित कर लोगों को विधेयक के संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों, जन संगठनों तथा अन्य लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष दलों को भी आंदोलन से जोड़ा जाएगा।

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अशोक यादव ने कहा कि संविधान में राज्यों के अधिकार और उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से निर्धारित है। केंद्र सरकार लगातार राज्यों के अधिकारों को अपने अधीन लेने का प्रयास कर रही है और MMDR संशोधन विधेयक भी इसी दिशा का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून से बड़े उद्योगपतियों और खनन क्षेत्र में काम करने वाले बड़े कारोबारी समूहों को लाभ पहुंच सकता है। खनिज संपदा वाले राज्यों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा और झारखंड को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है।

अशोक यादव ने कहा कि वाम दल इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाएंगे और जनता को विधेयक के प्रावधानों की जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर झारखंड बंद और आर्थिक नाकेबंदी जैसे बड़े आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं। उन्होंने सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत राज्य के अन्य राजनीतिक दलों से झारखंड के हित में आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

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