बेजुबानों की सुरक्षा के लिए बने सख्त कानून : 9 साल की कायरा मिश्रा की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील
रक्षाबंधन पर बेजुबान जानवरों को राखी बांधकर कायरा ने दिया इंसानियत और संवेदना का संदेश, बोलीं- जानवरों पर अत्याचार करने वालों में कानून का डर जरूरी
नवींन कुमार
रांची। रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प के लिए जाना जाता है, लेकिन रांची की महज नौ साल की कायरा मिश्रा ने इस पर्व को एक अलग और बेहद संवेदनशील संदेश से जोड़ दिया है। सेंट माइकल्स स्कूल, रांची की कक्षा पांच की छात्रा कायरा ने रक्षाबंधन के अवसर पर बेजुबान जानवरों को राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प लिया।
कायरा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि बेजुबान जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता और अत्याचार को रोकने के लिए प्रभावी और सख्त कानून बनाए जाएं। उनका कहना है कि जानवर अपनी पीड़ा इंसानों की तरह शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज और सरकार की है।

राखी सिर्फ धागा नहीं, बेजुबानों की सुरक्षा का संकल्प
कायरा पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन के दिन बेजुबान जानवरों को रक्षा सूत्र बांधती आ रही हैं। उनके लिए राखी महज एक परंपरा नहीं, बल्कि उन जीवों की रक्षा का संकल्प है, जो इंसानों के बीच रहते हैं और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं।
कायरा का मानना है कि जिन जानवरों को हम अक्सर ‘कम्युनिटी एनिमल्स’ कहते हैं, वे भी हमारे समाज का हिस्सा हैं। ऐसे में उनके साथ मारपीट, क्रूरता या किसी भी तरह का अत्याचार स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
घर में 12 से 15 रेस्क्यू किए गए कुत्ते-बिल्लियां
कायरा की संवेदना केवल रक्षाबंधन के दिन तक सीमित नहीं है। रांची के पिस्का मोड़ स्थित उनके घर में करीब 12 से 15 रेस्क्यू किए गए कुत्ते और बिल्लियां परिवार के सदस्यों की तरह रह रहे हैं।
कायरा के माता-पिता ने अलग-अलग परिस्थितियों में इन जानवरों को रेस्क्यू कर अपने घर में जगह दी। इनमें कुछ ऐसे जानवर भी हैं, जिन्हें गंभीर चोटें आई थीं। किसी की कमर टूटी हुई थी, तो किसी की जान बचाने के लिए तत्काल उपचार और देखभाल की जरूरत थी। कई जानवरों को लंबे समय तक विशेष देखभाल की आवश्यकता पड़ी।
आज ये सभी जानवर कायरा के परिवार का हिस्सा हैं और घर में उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों की तरह ही प्यार और देखभाल मिलती है।

खुद करती हैं बेजुबानों की देखभाल
महज नौ वर्ष की उम्र में कायरा जानवरों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानती हैं। वह उन्हें खाना खिलाती हैं, उनके साथ समय बिताती हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी दवाइयों और उपचार में भी सहयोग करती हैं।
परिवार के अनुसार, कायरा के मन में जानवरों के प्रति प्रेम और संवेदना बचपन से ही रही है। किसी घायल या बीमार जानवर को देखकर वह उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी मदद करने की कोशिश करती हैं।
उनका संदेश साफ है—बेजुबानों को दया नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान चाहिए।
कानून का डर होगा तो कम होगी क्रूरता
कायरा ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा है कि जानवरों के साथ क्रूरता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक दोषियों में कानून का डर नहीं होगा, तब तक बेजुबान जानवरों के साथ होने वाली हिंसा को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा।
एक छोटी बच्ची की यह मांग अपने आप में समाज के लिए बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि क्या इंसानियत की सीमा सिर्फ इंसानों तक होनी चाहिए? कायरा का मानना है कि सुरक्षा का अधिकार हर जीव को मिलना चाहिए।

पत्रकार पिता और PRO मां का मिला संस्कार
कायरा की मां पूजा मिश्रा असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर हैं, जबकि उनके पिता पेशे से पत्रकार हैं। रांची के पिस्का मोड़ में रहने वाला यह परिवार लंबे समय से रेस्क्यू किए गए जानवरों की देखभाल करता आ रहा है।
परिवार का माहौल ही ऐसा है, जहां बेजुबानों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी को महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि कायरा ने छोटी उम्र में ही पशु संरक्षण और इंसानियत को अपनी सोच का हिस्सा बना लिया है।
कायरा की राखी में छिपा बड़ा संदेश
रक्षाबंधन पर कायरा द्वारा बेजुबानों को बांधी गई राखी समाज के लिए एक भावनात्मक संदेश है। यह राखी केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस जीव की सुरक्षा का प्रतीक है जो अपनी रक्षा के लिए इंसानों पर निर्भर है।
कायरा की पहल यह याद दिलाती है कि इंसानियत की असली पहचान केवल अपनी सुरक्षा की चिंता करने में नहीं, बल्कि उन जीवों की रक्षा करने में भी है जो बोल नहीं सकते।
कायरा की राखी में धागा भले छोटा हो, लेकिन उसका संदेश बहुत बड़ा है—बेजुबानों पर अत्याचार बंद हो, उनके लिए सख्त कानून बने और समाज उन्हें भी सम्मान के साथ जीने का अधिकार दे।


















