देवघर में साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, पांच गिरफ्तार; APK भेजकर मोबाइल का एक्सेस लेने का खुलासा
देवघर: साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में देवघर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सारठ थाना क्षेत्र के डकाय जंगल में पुलिस ने छापेमारी कर पांच कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर Flipkart, Amazon के कस्टमर केयर प्रतिनिधि, Airtel Payment Bank अधिकारी और Google Pay-PhonePe कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने का आरोप है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों को झांसे में लेकर उनके मोबाइल पर APK फाइल भेजते थे। इसके जरिए मोबाइल का एक्सेस हासिल कर साइबर ठगी करने की कोशिश की जाती थी।
गुप्त सूचना पर डकाय जंगल में छापेमारी
पुलिस को सूचना मिली थी कि डकाय जंगल में कुछ लोग साइबर ठगी की गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस उपाधीक्षक कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में टीम ने इलाके में घेराबंदी कर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पांच संदिग्धों को पकड़ा गया।
छह मोबाइल और छह सिम बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस अब बरामद मोबाइल और सिम की जांच कर रही है, ताकि ठगी के नेटवर्क और आरोपियों के संपर्क में रहे अन्य लोगों की जानकारी सामने आ सके।
एक आरोपी का पहले भी साइबर अपराध का इतिहास
गिरफ्तार आरोपियों में विक्रम कुमार दास (21) का पहले भी साइबर अपराध से जुड़ा आपराधिक इतिहास सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वह साइबर थाना देवघर के 2023, 2024 और 2025 के अलग-अलग मामलों में जेल जा चुका है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम
पुलिस ने जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है—
– सुभाष कुमार दास (26)
– विकास कुमार दास (20)
– धनंजय महरा (24)
– कुंदन कुमार (21)
– विक्रम कुमार दास (21)
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी देवघर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं।
APK फाइल के जरिए ठगी का तरीका
इस मामले में सामने आया तरीका साइबर ठगी के एक खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करता है। ठग खुद को किसी कंपनी या डिजिटल पेमेंट सेवा का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद समस्या के समाधान, रिफंड या खाते से जुड़ी किसी प्रक्रिया के नाम पर मोबाइल में APK फाइल इंस्टॉल कराने की कोशिश करते हैं।
ऐसी फाइल इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस बरामद मोबाइल और सिम की जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और इस नेटवर्क में उनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

















