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राम मंदिर दान चोरी मामले में चार्जशीट की डेडलाइन करीब, 8 आरोपियों की जमानत पर टिकी नजर

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अयोध्या: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी से जुड़े चर्चित मामले की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 90 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने की है। यह अवधि 22 सितंबर को पूरी हो रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस किसी भी समय अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

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यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं होता है और मामले में 90 दिन की वैधानिक अवधि लागू मानी जाती है, तो गिरफ्तार आठों आरोपियों को डिफॉल्ट या वैधानिक जमानत का लाभ मिलने की स्थिति बन सकती है। वरिष्ठ अधिवक्ता वाईबी मिश्रा के मुताबिक, कानून में निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर आरोपी को वैधानिक जमानत मांगने का अधिकार मिल सकता है।

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राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद एसआईटी के निर्देश पर 25 जून को रामजन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र को आरोपी बनाया गया है।

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पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें मंदिर से चोरी, कर्मचारी के तौर पर संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति को रखने या उसके लेन-देन में मदद करने, आपराधिक षड्यंत्र और साझा मंशा से अपराध करने से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

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पुलिस की जांच में आरोपियों की भूमिका अलग-अलग बताई गई है। जांच के मुताबिक—

* रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास दानपात्रों की चाबियां होने और मंदिर के कामकाज में उसकी सीधी भूमिका होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, चाबियां उसके पास रहने के लिए कोई औपचारिक आदेश नहीं था।

* अनुकल्प मिश्र चढ़ावे की नकदी की गिनती से जुड़ा था। पुलिस जांच में उसे मामले का प्रमुख आरोपी बताया गया है। उसके घर से करीब 20 लाख रुपये बरामद किए जाने की बात कही गई है।

* लवकुश मिश्र भी नकदी की गिनती के काम से जुड़ा था। उसके घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई है।

* मनीष यादव को टिन्नू यादव का भतीजा बताया गया है और वह भी नकदी की गिनती से जुड़े काम में शामिल था।

* सुभाष श्रीवास्तव केनरा बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद ट्रस्ट से जुड़े थे और चढ़ावे की रकम की गिनती की निगरानी से संबंधित कार्य करते थे।

* अविनाश शुक्ल भी नकदी की गिनती से जुड़ा था। जांच में उसके बैंक खाते से करीब पांच लाख रुपये रिकवर किए जाने की बात सामने आई है।

* करुणेश पांडेय चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़ा था और जांच में उसे अनुकल्प मिश्र के करीबी के तौर पर चिन्हित किया गया।

* रमाशंकर मिश्र भी नकदी की गिनती के काम में शामिल था। उसके पास से भी नकदी बरामद होने की बात पुलिस जांच में सामने आई है।

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विवेचना के दौरान मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई है। इसके अलावा चढ़ावे की रकम की गिनती से संबंधित रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों को भी खंगाला गया। संबंधित कर्मचारियों और मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। जांच में फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित चार्जशीट में कथित चोरी की पूरी कार्यप्रणाली, आरोपियों की भूमिका, रकम से जुड़े रिकॉर्ड और जांच के दौरान हुई बरामदगी का विवरण दिया गया है।

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इस मामले में अब 22 सितंबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से कानूनी समय सीमा पर पुलिस की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले अदालत में आरोप पत्र दाखिल करती है या नहीं। अगर समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो आरोपियों की ओर से वैधानिक जमानत की मांग की जा सकती है। वहीं, पुलिस की ओर से जांच लगभग पूरी होने की बात कही जा रही है। ऐसे में अगले 24 घंटे इस मामले की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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