विश्व पर्यटन दिवस पर सिमडेगा के प्रमुख पर्यटन स्थल को नई पहचान की दरकार, आस्था, प्रकृति और विरासत का संगम रामरेखा धाम

सिमडेगा: विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सिमडेगा का रामरेखा धाम एक बार फिर धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत के संगम के रूप में चर्चा में है। जिला मुख्यालय से करीब 26 किलोमीटर दूर स्थित रामरेखा धाम को छोटानागपुर का कैलाश भी कहा जाता है। भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

रामरेखा धाम में प्राचीन प्राकृतिक गुफा के अलावा चरण पादुका, अग्निकुंड, सीता चूल्हा और गुप्त गंगा जैसे धार्मिक एवं प्राकृतिक महत्व के स्थल मौजूद हैं। पहाड़ी और वन क्षेत्र के बीच स्थित यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करता है।

पूर्णिमा के अवसर पर जुटते हैं श्रद्धालु
रामरेखा धाम में कार्तिक पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा के अवसर पर मेला आयोजित होता है। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों के कारण क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर कारोबार को भी बढ़ावा मिलता है।

18.87 करोड़ की पर्यटन परियोजना
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार रामरेखा धाम के विकास के लिए 18.87 करोड़ रुपये की पर्यटन परियोजना स्वीकृत की गई है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और आधारभूत संरचना के विकास से यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, वाहन चालकों और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

रामरेखा धाम के साथ पर्यटन सर्किट की संभावना
सिमडेगा में पर्यटन की संभावनाएं केवल रामरेखा धाम तक सीमित नहीं हैं। केलाघाघ डैम, केतुंगा धाम, वीरूगढ़ का सूर्य मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर सहित कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थल जिले की पर्यटन क्षमता को व्यापक बनाते हैं। केतुंगा धाम को सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध से जोड़कर भी देखा जाता है। इन स्थलों को बेहतर सड़क, सूचना-सुविधा और प्रचार-प्रसार के माध्यम से एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।

सुविधाएं बढ़ें तो बढ़ेगा पर्यटन
विश्व पर्यटन दिवस पर रामरेखा धाम सहित जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाने की जरूरत है। बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छता, पार्किंग, पेयजल, पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र और डिजिटल प्रचार जैसी सुविधाओं के विस्तार से पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही विकास के दौरान क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत, पर्यावरण और धार्मिक गरिमा को सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा।

रामरेखा धाम में धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय विरासत तीनों मौजूद हैं। योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाए तो यह स्थल सिमडेगा की पहचान को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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