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म्यूटेशन के लिए भटक रहे जमीन खरीदार: रांची के 22 अंचलों में 5.91 लाख आवेदन, 3.37 लाख रिजेक्ट

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कांके में सबसे ज्यादा 65,834 आवेदन खारिज; ऑनलाइन रजिस्ट्री के डेटा में गड़बड़ी बनी बड़ी वजह, नाम, जाति, खाता-प्लॉट में सुधार नहीं होने से बढ़ी परेशानी

रांची। झारखंड में जमीन खरीदने के बाद दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन कराना खरीदारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। रांची जिले में जमीन की खरीद-बिक्री अधिक होने के बावजूद म्यूटेशन के आवेदन स्वीकृत होने से ज्यादा रिजेक्ट हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जमीन खरीदने वाले लोगों को म्यूटेशन कराने के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रांची जिले के 22 अंचलों में चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 5,91,079 म्यूटेशन के मामले आए हैं। इनमें 3,37,265 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए, जबकि 2,37,956 मामलों में म्यूटेशन स्वीकृत हुआ है। वहीं, 15,858 मामले अब भी लंबित हैं। यानी कुल आवेदनों में करीब 57 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए हैं।

म्यूटेशन के लिए भटक रहे जमीन खरीदार: रांची के 22 अंचलों में 5.91 लाख आवेदन, 3.37 लाख रिजेक्ट

ऑनलाइन रजिस्ट्री के डेटा में गड़बड़ी बनी बड़ी वजह

म्यूटेशन के आवेदन रिजेक्ट होने की मुख्य वजह ऑनलाइन रजिस्ट्री के डेटा में गड़बड़ी बताई जा रही है। अंचल अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्री के बाद एनजीडीआरएस पोर्टल से अंचल कार्यालयों को मिलने वाले डीड और डेटा में विसंगतियां आ रही हैं। पहले इस तरह की गड़बड़ियों को सुधारने की व्यवस्था राजस्व उप निरीक्षकों के पास थी, लेकिन अब यह सिस्टम बंद हो गया है। ऐसे में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान नाम, जाति, खाता और प्लॉट से संबंधित गलतियों में सुधार नहीं हो पा रहा है। डेटा में गड़बड़ी के कारण म्यूटेशन के आवेदन रिजेक्ट किए जा रहे हैं। इसका सीधा असर जमीन खरीदारों पर पड़ रहा है, जिन्हें दाखिल-खारिज कराने के लिए बार-बार आवेदन करना पड़ रहा है।

दोबारा आवेदन के बाद भी नहीं सुधर रही गड़बड़ी

ऑनलाइन रजिस्ट्री के डेटा में गड़बड़ी दूर करने की व्यवस्था बंद होने से समस्या और गंभीर हो गई है। आवेदन रिजेक्ट होने के बाद खरीदार दोबारा आवेदन करते हैं, लेकिन मूल डेटा में सुधार नहीं होने के कारण समस्या बनी रहती है।
इससे अंचल कार्यालयों में म्यूटेशन के लंबित मामलों का बोझ भी बढ़ रहा है। जमीन की खरीद-बिक्री के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रभावित होने से खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

म्यूटेशन के लिए भटक रहे जमीन खरीदार: रांची के 22 अंचलों में 5.91 लाख आवेदन, 3.37 लाख रिजेक्ट

कांके में सबसे ज्यादा आवेदन रिजेक्ट

अंचलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कांके में सबसे ज्यादा 65,834 आवेदन रिजेक्ट हुए हैं। इसके बाद नामकुम में 61,980, नगड़ी में 34,729 और रातू में 31,876 आवेदन खारिज किए गए हैं।म्यूटेशन के लंबित मामलों में भी कांके सबसे आगे है। यहां 3,744 मामले लंबित हैं, जबकि नामकुम में 2,563 मामले अब तक निष्पादित नहीं हुए हैं।

अंचल कुल आवेदन स्वीकृत रिजेक्ट लंबित
अनगड़ा 14,752 5,727 8,672 333
अरगोड़ा 28,905 10,516 17,571 818
इटकी 6,925 3,884 2,904 137
ओरमांझी 31,472 11,468 18,904 1,100
कांके 1,14,452 44,874 65,834 3,744
खलारी 2,078 712 1,353 13
चान्हो 12,845 6,265 6,129 451
तमाड़ 4,528 2,074 2,355 99
नगड़ी 59,717 23,629 34,729 1,359
नामकुम 1,13,011 48,468 61,980 2,563
बड़गाईं 36,274 13,783 21,521 970
बेड़ो 9,945 5,837 3,884 224
बुड़मू 11,270 5,302 5,691 277
बुंडू 9,808 5,152 4,410 246
मांडर 13,781 7,128 6,149 504
रातू 55,664 22,704 31,876 1,084
राहे 2,421 1,016 1,361 44
लापुंग 2,602 1,436 1,034 132
शहर 24,815 5,375 18,368 1,072
सिल्ली 5,398 2,361 3,009 28
सोनाहातू 3,030 1,076 1,953 1
हेहल 27,406 9,169 17,578 659
कुल 5,91,099 2,37,956 3,37,265 15,858

 

सभी सीओ को म्यूटेशन के मामलों में तेजी लाने का निर्देश

रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सभी अंचल अधिकारियों को म्यूटेशन के मामलों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। जिन अंचलों में 30 दिन या 90 दिन से अधिक समय से मामले लंबित हैं, वहां उनकी समीक्षा कर जल्द निष्पादन करने को कहा गया है। इसके अलावा, पोर्टल में आ रही समस्याओं को दूर करने का भी निर्देश दिया गया है। उपायुक्त ने कहा है कि जल्द ही समस्या दूर होगी।

जमीन खरीदारों के सामने बड़ी चुनौती

रांची जिले में जमीन की खरीद-बिक्री अधिक होने के कारण म्यूटेशन के मामलों का दबाव भी ज्यादा है। ऐसे में ऑनलाइन रजिस्ट्री के डेटा में गड़बड़ी और सुधार की व्यवस्था बंद होने से खरीदारों की परेशानी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद लंबित मामलों का निष्पादन कितनी तेजी से होता है और ऑनलाइन रजिस्ट्री के डेटा में गड़बड़ी दूर करने की व्यवस्था कब तक बहाल हो पाती है।

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।