आदिवासी नेत्री निशा भगत का पैतृक गांव उरु में अंतिम संस्कार, चार पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गज हुए शामिल

निर्मल सिंह
गुमला: आदिवासी नेत्री निशा भगत का शनिवार को उनके पैतृक गांव उरु में आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां गुमला पहुंचीं। निशा भगत के असामयिक निधन से जिले में शोक की लहर है।
ईसाई मिशनरी के खिलाफ और सरना-सनातन के समर्थन में मुखर रहने वाली निशा भगत रांची में रहकर आदिवासी अस्मिता और अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाती थीं। शुक्रवार को फेसबुक लाइव के बाद उनके आत्महत्या करने की घटना सामने आई थी। फेसबुक लाइव में उन्होंने जमीन विवाद, घर में चोरी और न्याय नहीं मिलने को लेकर कुछ पुलिस पदाधिकारियों एवं सामाजिक नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। घटना के बाद से ही पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल है।

निशा भगत का शव गुमला के डीएसपी रोड स्थित उनके पिता हांदू भगत के आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। यहां परिजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के नेताओं की भीड़ जुटी। पिता हांदू भगत ने बेटी की मौत के पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पिठोरिया थाना में अजय तिर्की और ज्योत्सना केरकेट्टा के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।
निशा भगत को श्रद्धांजलि देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और मधु कोड़ा गुमला पहुंचे। इनके अलावा गुमला विधायक भूषण तिर्की, जिला परिषद अध्यक्ष किरण बाड़ा, पूर्व विधायक कमलेश उरांव, भाजपा जिलाध्यक्ष सागर उरांव, खूंटी विधायक और पूर्व विधायक देव कुमार धान समेत बड़ी संख्या में राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उनके आवास पहुंचे। कई नेता और समर्थक अंतिम संस्कार में शामिल होने पैतृक गांव उरु भी पहुंचे। नेताओं और समर्थकों के आगमन के कारण शहर में दिनभर वीआईपी मूवमेंट बना रहा। साप्ताहिक हाट और धनतेरस बाजार के कारण पहले से ही भीड़ थी, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।

डीएसपी रोड स्थित आवास से निशा भगत का पार्थिव शरीर फूलों से सजे एंबुलेंस में रखकर नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए टावर चौक लाया गया। यहां पहले से मौजूद आदिवासी संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने करीब आधे घंटे तक सड़क जाम कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। सड़क जाम के कारण चारों मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाद में एंबुलेंस को पैतृक गांव उरु के लिए रवाना किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत की मौत पर दुख जताते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निशा भगत आदिवासी हितों की रक्षा के लिए मुखर होकर अपनी बात रखती थीं। फेसबुक लाइव में उन्होंने खुद को प्रताड़ित और असहाय महसूस करने की बात कही थी। मरांडी ने कहा कि पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की सुरक्षा के मामले में हेमंत सरकार विफल रही है।

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