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निशा भगत आत्महत्या मामला: पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला, मुख्यमंत्री से इस्तीफे और नामजदों की गिरफ्तारी की मांग

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रांची: झारखंड में जमीन माफियाओं के बढ़ते आतंक, प्रशासनिक अराजकता और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। जनजाति समाज के अधिकारों के लिए मुखर होकर लड़ने वाली निशा भगत की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस बीच, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर हेमंत सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर तीखा हमला बोला है।

“जनजाति गौरव दिवस” के दिन व्यवस्था पर बड़ा आघात
बाबूलाल मरांडी ने इस बेहद संवेदनशील और मर्माहत करने वाली घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां पूरे राज्य और देश में ‘जनजाति गौरव दिवस’ के आयोजन किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनजाति समाज के अधिकारों और न्याय के लिए लड़ने वाली निशा भगत को ऐसी त्रासद स्थिति का सामना करना पड़ा कि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। यह राज्य की वर्तमान व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की पोल खोलता है।

निशा भगत आत्महत्या मामला: पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला, मुख्यमंत्री से इस्तीफे और नामजदों की गिरफ्तारी की मांग

वीडियो में आए गंभीर नाम और तत्काल कार्रवाई की मांग

निशा भगत द्वारा अपनी मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो का हवाला देते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उस वीडियो में मुख्यमंत्री, पिठोरिया थाने के थानेदार, और अजय तिर्की जैसे प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं। उन्होंने मांग की है कि:

निशा भगत के वायरल वीडियो में जिन-जिन लोगों के नाम लिए गए हैं, उन सभी के खिलाफ तत्काल एफ.आई.आर. (FIR) दर्ज की जाए।
नामजद आरोपियों और संबंधित थानेदार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए ताकि निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हो सके।

भू-माफियाओं और पुलिस-प्रशासन पर सीधा संरक्षण का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने झारखंड के मौजूदा हालात को “Lawless” (कानून-विहीन) करार देते हुए कहा कि राज्य के हर अंचल और ब्लॉक में जमीन के दलाल और लुटेरे सक्रिय हैं। आम जनता की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जा रहा है, लेकिन अंचल कार्यालय (CO) से लेकर पुलिस थानों और जिला प्रशासन तक कोई भी फरियादी की सुनने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तमाम भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों को राज्य के मुख्यमंत्री का सीधा संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस महकमा और जिला प्रशासन अपराधियों पर हाथ डालने से कतराता है। उन्होंने कहा समाज के लिए लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जब इन अवैध गतिविधियों का विरोध करते हैं, तो कोई भी प्रशासनिक अधिकारी—चाहे वह थानेदार हो, एसपी हो या डीसी—उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं होता है।

निशा भगत आत्महत्या मामला: पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला, मुख्यमंत्री से इस्तीफे और नामजदों की गिरफ्तारी की मांग

उन्होंने आरोप लगाया की

​1. अजय तिर्की और पिठोरिया थानेदार का सुसाइड से पहले संपर्क व धमकियां
​निशा भगत द्वारा आत्महत्या से पहले वायरल वीडियो और बयानों का जिक्र करते हुए बाबूलाल मरांडी ने बताया कि:
​निशा भगत ने अपने वीडियो और बयानों में अजय तिर्की का नाम लिया था।
​अजय तिर्की द्वारा उनके विरोध में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डाले जा रहे थे और उन्हें गंभीर रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
​घटना से ठीक पहले निशा भगत ने संभवतः पुलिस (पिठोरिया थाने के दरोगा/थानेदार) को टेलीफोन करके अपनी गंभीर स्थिति और आत्महत्या करने तक की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया और मामले को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

​2. आत्महत्या के लिए मजबूर करने और न्याय की मांग

​बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत को एक होनहार, लड़ाकू और मुखर युवती बताते हुए कहा कि उन्हें सुनियोजित तरीके से आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया है। उन्होंने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
​गिरफ्तारी: पिठोरिया के संबंधित थानेदार (दरोगा) और अजय तिर्की को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
​सीबीआई जांच: इस पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निशा भगत को किन कारणों से इतना मजबूर होना पड़ा।

​3 . राज्य की कानून-व्यवस्था और साहिबगंज जैसी घटनाओं का जिक्र

​पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य के मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री से राज्य की सत्ता और कानून-व्यवस्था नहीं संभल रही है, अपराध और जमीन माफियाओं पर नियंत्रण नहीं रखा जा रहा है, तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले साहिबगंज में एक महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टर द्वारा सुसाइड का मामला हो या रूपेश हेंदा (सूर्या हंसदा) का मामला, इस प्रकार की घटनाओं में आज तक निष्पक्ष जांच करके सच्चाई सामने नहीं लाई गई।

मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग

राज्य में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक विफलता और एक संघर्षशील महिला के सुसाइड मामले में शीर्ष स्तर पर नाम आने के बाद, बाबूलाल मरांडी ने नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री से अपने पद से त्यागपत्र देने की मांग की है। यह मामला अब केवल एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि झारखंड में प्रशासनिक और राजनीतिक साठगांठ का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिस पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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आकाश सिंह

आकाश सिंह

वरिष्ठ संवाददाता

आकाश सिंह - पिछले करीब 18 वर्षों से राजनीतिक और क्राइम बीट पर सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इस दौरान जमीनी रिपोर्टिंग, चुनाव कवरेज, प्रशासनिक मुद्दों और संवेदनशील मामलों पर गहराई से काम किया है। साथ ही, पिछले लगभग 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अनुभव रखते हैं, जहां न्यूज स्क्रिप्ट लेखन, वीडियो कंटेंट निर्माण, वॉइसओवर और सोशल मीडिया के लिए प्रभावी कंटेंट तैयार किया है