tribal-leader-nisha-bhagat-dies-ranchi

निशा भगत फेसबुक लाइव मामला: जब एक जिंदगी संकट में थी, तब सोशल मीडिया पर आते रहे हार्ट और हंसने वाले रिएक्शन!

Share
Link copied

लाइव वीडियो देखने वाले लोगों की भूमिका पर उठे सवाल, क्या सोशल मीडिया पर संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी खत्म होती जा रही है?

रांची। निशा भगत की मौत से जुड़ा फेसबुक लाइव अब कई गंभीर सामाजिक और मानवीय सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी पीड़ा, परेशानी या जिंदगी से जुड़े गंभीर हालात साझा कर रहा हो, तब उसे देखने वाले लोग आखिर क्या कर रहे होते हैं? लाइव वीडियो से जुड़े तमाम पहलुओं की सच्चाई पुलिस अनुसंधान के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन इस घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया और संवेदनशीलता को लेकर एक अलग बहस छेड़ दी है।

लाइव वीडियो पर 542 प्रतिक्रियाएं, हंसने वाले रिएक्शन भी!

इस मामले से जुड़े फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट में कुल 542 प्रतिक्रियाएं दिखाई दे रही हैं। इनमें 409 लाइक, 66 दुख जताने वाली प्रतिक्रियाएं, 47 हंसने वाली प्रतिक्रियाएं और 13 हार्ट रिएक्शन नजर आ रहे हैं। इन आंकड़ों ने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है। अगर कोई व्यक्ति गंभीर मानसिक या व्यक्तिगत संकट से गुजरते हुए लाइव वीडियो कर रहा है, तो उस समय हंसने वाले इमोजी या हार्ट रिएक्शन भेजने का क्या मतलब है? हालांकि, केवल रिएक्शन देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किस व्यक्ति ने किस मंशा से प्रतिक्रिया दी थी। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि स्क्रीनशॉट में दिखने वाले सभी लोगों ने लाइव वीडियो उसी समय देखा था या बाद में पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी। फिर भी ऐसी घटनाएं सोशल मीडिया के इस्तेमाल के तरीके पर आत्ममंथन की जरूरत जरूर पैदा करती हैं।

क्या लाइव देखने वालों की कोई जिम्मेदारी नहीं थी?

इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू उन लोगों की भूमिका है, जो कथित तौर पर लाइव वीडियो तक पहुंचे थे। अगर किसी व्यक्ति की बातों या व्यवहार से यह संकेत मिलता है कि वह तत्काल खतरे में है, तो क्या दर्शकों को केवल वीडियो देखना चाहिए? क्या किसी ने मदद के लिए फोन किया? क्या स्थानीय पुलिस, परिजनों या प्रशासन को सूचना देने की कोशिश की गई? क्या किसी ने लाइव वीडियो के जरिए मदद पहुंचाने का प्रयास किया? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकते हैं। यह भी संभव है कि कुछ लोगों ने मदद की कोशिश की हो, जिसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है।

क्या सोशल मीडिया सिर्फ तमाशा देखने का माध्यम बन गया है?

आज फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव वीडियो के दर्शकों की संख्या को लोकप्रियता से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हर लाइव वीडियो मनोरंजन नहीं होता। कई बार इसके पीछे किसी व्यक्ति की पीड़ा, घरेलू विवाद, मानसिक तनाव या तत्काल मदद की जरूरत छिपी हो सकती है। ऐसे समय में हंसने वाले इमोजी, मजाकिया टिप्पणियां या तमाशबीन बने रहना किसी संकटग्रस्त व्यक्ति की परेशानी को और बढ़ा सकता है।सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देना आसान है, लेकिन किसी की मदद के लिए आगे आना वास्तविक मानवीय जिम्मेदारी है।

पुलिस जांच करेगी, लेकिन समाज को भी खुद से पूछने होंगे सवाल

निशा भगत के लाइव वीडियो, उसमें लिए गए नाम, घटना से पहले की परिस्थितियों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच पुलिस का विषय है। लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कुछ सवाल जरूर छोड़ दिए हैं। क्या हम सोशल मीडिया पर किसी की परेशानी को भी मनोरंजन समझने लगे हैं? क्या सैकड़ों लोगों के ऑनलाइन मौजूद रहने के बावजूद किसी जरूरतमंद तक मदद नहीं पहुंच पाती? और क्या डिजिटल दुनिया में हमारी संवेदनशीलता केवल लाइक और इमोजी तक सिमटती जा रही है? निशा भगत की मौत की जांच पुलिस करेगी, लेकिन सोशल मीडिया पर मौजूद हर व्यक्ति को अपनी मानवीय जिम्मेदारी पर भी विचार करना होगा। आखिर किसी की जिंदगी संकट में हो, तो हमारा पहला रिएक्शन इमोजी नहीं, मदद का प्रयास होना चाहिए।

 

फेसबुक पोस्ट पर किसने दिए कौन से रिएक्शन?

कुल रिएक्शन: 542
👍 लाइक: 409 |
😢 सैड: 66 |
😆 हंसी: 47 |
❤️ हार्ट: 13
ABOUT THE AUTHOR
रिक्की राज

रिक्की राज

रिपोर्टर

रिक्की राज को पिछले दस वर्षों का मीडिया के क्षेत्र का अनुभव है । इस दौरान पांच वर्षो से इन्होंने डिजिटल मीडिया के लिए इन्होंने कई बड़ी खबरों का कवरेज किया है ।