Akshat Kesari death case: CM Hemant Soren orders Deoghar Police to investigate.

अक्षत केसरी मौत मामला: CM हेमंत सोरेन ने देवघर पुलिस को दिए जांच के आदेश, परिजनों के सवाल—हत्या की धाराओं के बावजूद आरोपी को P/R Bond पर क्यों छोड़ा?

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Deoghar News: देवघर के जसीडीह थाना क्षेत्र स्थित कथित नशा मुक्ति केंद्र में 13 वर्षीय अक्षत केसरी की मौत का मामला अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंच गया है। मामले को लेकर सामने आए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री ने देवघर पुलिस को पूरे मामले की गहन जांच कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से देवघर पुलिस को निर्देश दिया गया है—“उक्त मामले की गहन जांच कर कड़ी कार्रवाई करते हुए सूचित करें।” इसके बाद मामले की जांच को लेकर उम्मीद जगी है कि पुलिस अब घटनाक्रम के साथ-साथ आरोपियों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा करेगी।

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FIR में हत्या और साजिश की धाराएं

मामले में जसीडीह थाना कांड संख्या 247/2026 दर्ज होने की बात सामने आई है। FIR में BNS की धारा 103(1) और 61(2) के तहत मामला दर्ज है। इसी को लेकर मृतक के परिजनों की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

परिजनों का आरोप है कि प्राथमिकी में गंभीर धाराएं होने के बावजूद संस्थान के निदेशक कृष्ण मुखर्जी को थाना स्तर से P/R Bond पर छोड़ दिया गया। परिवार अब यह जानना चाहता है कि उन्हें किस कानूनी प्रावधान के तहत P/R Bond पर छोड़ा गया और इस निर्णय का आधार क्या था।

“मुख्य आरोपी को थाना स्तर से क्यों छोड़ा गया?”

मृतक के परिवार की ओर से मांग की गई है कि इस बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि जसीडीह PS Case No. 247/2026 में मुख्य आरोपी कृष्ण मुखर्जी को किस कानूनी प्रावधान के तहत P/R Bond पर छोड़ा गया।

परिवार का कहना है कि यदि FIR में हत्या और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, तो आरोपी को थाने से छोड़ने के निर्णय के पीछे पुलिस की क्या कानूनी राय थी, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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संस्थान को अब तक सील क्यों नहीं किया गया?

परिजनों ने नशा मुक्ति केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना के बाद भी संस्थान को अब तक सील नहीं किया गया है।

परिवार की मांग है कि घटनास्थल और संस्थान से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए संस्थान की तत्काल जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर उसे सील किया जाए, ताकि किसी भी संभावित साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की आशंका न रहे।

दो नामजद आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग

परिजनों की ओर से प्राथमिकी में नामजद कृष्ण मुखर्जी एवं सुमित उर्फ साहिल सिंह को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। परिवार जानना चाहता है कि दोनों को न्यायिक हिरासत में क्यों नहीं भेजा गया और पुलिस ने उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की है।

परिजनों का कहना है कि मामले में निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब पुलिस आरोपी पक्ष की भूमिका, संस्थान की गतिविधियों और घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच करे।

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नशा मुक्ति केंद्र की आड़ में ड्रग्स कारोबार का भी आरोप

मामले को केवल अक्षत केसरी की मौत तक सीमित नहीं रखने की मांग की जा रही है। परिवार ने आरोप लगाया है कि नशा मुक्ति के नाम पर कथित अवैध ड्रग्स कारोबार की भी जांच होनी चाहिए।

परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि संस्थान में नशीले पदार्थों की कथित गतिविधियों, उनके स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और संस्थान की भूमिका की भी जांच की जाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

CID या CBI जांच की मांग

मृतक के परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए CID या CBI जांच की मांग भी की है। परिवार का कहना है कि स्थानीय पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले से सवाल खड़े हो रहे हैं, इसलिए किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

परिवार की प्रमुख मांगों में आरोपी कृष्ण मुखर्जी को P/R Bond पर छोड़े जाने की जांच, संस्थान को सील करना, प्राथमिकी अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, कथित ड्रग्स कारोबार की जांच और अक्षत केसरी को न्याय दिलाना शामिल है।

CM के निर्देश के बाद  देवघर पुलिस ने अपनी कार्रवाई की जानकारी दी ।

पुलिस ने बताया कि जसीडीह थाना कांड संख्या 247/2026, दिनांक 23 जुलाई 2026 को BNS की धारा 103(1) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, अनुसंधान और साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले के दो मुख्य अभियुक्तों—अंकित राज और अहिर मुखर्जी उर्फ अभीरभव मुखर्जी—को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
देवघर पुलिस ने मुख्यमंत्री को भेजे जवाब में कहा है कि अनुसंधान के दौरान प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर अग्रतर कार्रवाई की जा रही है।

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