छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को बड़ा झटका: चार जिलों में 66 नक्सलियों ने किया सरेंडर
रायपुर : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। चार जिलों बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में 66 नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल 2.27 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह घटना “पूना मारगेम” अभियान के तहत हुई, जिसे बस्तर संभाग में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए शुरू किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बीजापुर जिले में 25 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिन पर 1.15 करोड़ रुपये का इनाम था। नारायणपुर में 8 नक्सलियों ने हथियार डाले, जिन पर 33 लाख रुपये का इनाम था। सुकमा और दंतेवाड़ा में भी क्रमशः नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात नक्सली शामिल हैं, जो हिंसक घटनाओं में संलिप्त थे।
नक्सलियों ने माओवादी विचारधारा को “खोखला और अमानवीय” बताते हुए सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस के अभियानों से प्रभावित होकर हथियार छोड़ने का निर्णय लिया। छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलियों पर दबाव बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप यह सामूहिक आत्मसमर्पण हुआ।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सफलता पर सुरक्षा बलों और छत्तीसगढ़ पुलिस को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त भारत अभियान में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार नक्सलियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने की संभावना है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और उनका मुख्यधारा में पुनर्वास किया जाएगा। इस घटना से बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की कमजोर होती पकड़ और सुरक्षा बलों की मजबूत रणनीति का स्पष्ट संकेत मिलता है।

















